जून 2026

देशआम आदमी     Posted: January 2, 2017

चुनाव–बुखार चरम सीमा पर था। सारा शहर, पोस्टरों, बैनरों, पैम्पलेटों से पटा पड़ा था। जगह -जगह लोग चाय की चुस्की या दारू के  घूँट के साथ, बहस में उलझे थे, मुद्दा था–आम आदमी।

फटा पाजामा, गंदा, मुड़ा–तुड़ा कुर्ता पहने एक खस्ता हाल आदमी उनके पास खड़ा था। उनसे बेखबर वह, न तो अपने बाएँ देख रहा था, और न ही दाएँ। वह ऊँचाई पर टंगे कपड़े के बैनरों को देख रहा था, नदीदी नजर से।

उसे प्रतीथा थी, कि कब यह मेला खत्म हो, कपड़ों की लूट हो, और उसे दो कपड़े मिल जाएँ, एक बिछाने को, दूसरा ओढ़ने को।

-0-

गतिविधियाँ

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)


    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´

    रचनाएँ भेजने के लिए ई-मेल-:-

    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-

    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    केवल स्वीकृत रचनाओं की ही सूचना दी जाती है।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine