
राज्य की राजधानी से मात्र सौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव अब धीरे-धीरे तरक्की की राह पर है, पक्के रोड बन रहे हैं, पानी की पाइपलाइन बिछ रही है। गांव की औरतें खुश हैं कि उनको दूर पोखर- तालाब से पानी नहीं लाना पड़ेगा। एक दो हैंड पंप सरकार ने लगाए थे , लेकिन जलस्तर इतना नीचे चला गया है कि गर्मी में तो वह शांत बैठ जाता है। लोग उस पर भरोसा करते ही नहीं, आज भी अपने काम के लिए गांव के लोग पोखर पर ही विश्वास करते हैं और खेती के लिए उन्हें बरसात का इंतजार करना पड़ता है ।
पानी की पाइपलाइन जब उनके घरों तक पहुंची तो उनको लगा कि अब उनके दिन बदलने वाले हैं। लेकिन उम्मीद पर विराम लग गया क्योंकि छह महीने हो गए, नल से पानी गिरा नहीं।
इधर हफ्ते दिन से गाँव में चहल-पहल बढ़ गई है। शहर से अफसर आकर इनका मुआयना करने लगे हैं। दो दिनों से बंद पड़े नल से पानी भी गिरने लगा है । जब से गांव वालों को पता चला है कि कोई देश के बड़े नेता गांव आ रहे हैं ,तब से वे चिंतित हैं,उन्हें आशंका हो गयी है कि पानी उनके लिए आ रहा है या नेताजी के लिए?
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