वह उस क्लर्क के पास कई चक्कर लगा चुका था पर काम नहीं बन रहा था। चपरासी को उस भोले पंछी पर दया आ गई थी। उसने बताया कि तुम उसके दराज में या मेज के नीचे से पाँच सौ का नोट पकड़ा देना, तुम्हारा काम जरूर हो जाएगा। वह अगली सुबह नौ बजे ही दफ्तर पहुँच गया। वह क्लर्क मेज पर अपनी धार्मिक पोथी रखकर तथा हाथ जोड़कर पाठ कर रहा था। उसने कानी आँख से उसके हाथ में पाँच सौ का नोट देख लिया। दूसरी तरफ वह नास्तिक व्यक्ति घबरा रहा था कि इस धार्मिक बंदे की सेवा कैसे की जाए, कहीं लेने के देने ही न पड़ जाएँ। अभी वह सोच रहा था कि उस धार्मिक व्यक्ति ने इशारा किया कि अपना नोट इसी पोथी पर रख दे और चलता बने। उस नास्तिक व्यक्ति ने डरते हुए अपना नोट उस धार्मिक पुस्तक पर रख दिया तथा बाहर आ गया। अब वह आस्तिक बंदा जल्दी-जल्दी से पाठ कर रहा था।
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