-मनुमुक्त मानव मेमोरियल ट्रस्ट

नारनौल, मनुमुक्त मानव मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा स्थानीय सेक्टर 1 पार्ट 2 स्थित अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र मनुमुक्त भवन में रविवार को भव्य इंडो- नेपाल लघुकथा सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें नेपाल तथा भारत के दस राज्यों से आए तीन दर्जन लघुकथाकारों और लोककथा समीक्षकों ने लघुकथा विधा के स्वरूप और स्थिति पर गंभीर विचार मंथन किया । डॉ. जितेंद्र भारद्वाज द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना गीत के बाद चीफ ट्रस्टी डॉ. रामनिवास मानव के प्रेरक सान्निध्य में लगभग चार घंटे तक चला यह सम्मेलन दो सत्रों में संपन्न हुआ। लघुकथा विधा के परिचय और लघुकथाकारों के सम्मान पर केन्द्रित प्रथम सत्र डॉ. पंकज गौड़ के संचालन में संपन्न हुआ। हरियाणा कला परिषद चंडीगढ़ के निदेशक अनिल कौशिक ने इस सत्र की अध्यक्षता की तथा चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय भिवानी के रजिस्ट्रार डॉ. जितेंद्र भारद्वाज इसमें मुख्य अतिथि थे। लघुकथा पाठ और लघुकथा समीक्षा पर केन्द्रित द्वितीय सत्र कांता राय के संचालन में संपन्न हुआ। सिंघानिया विश्वविद्यालय पचेरी बड़ी, राजस्थान के पूर्व कुलपति डॉ. उमाशंकर यादव ने इस सत्र की अध्यक्षता की वही भक्तपुर नेपाल के पूर्व प्रमुख जिला अधिकारी हरिप्रसाद भंडारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। पटना (बिहार) के वरिष्ठ लघुकथाकार डॉ. सतीशराज पुष्करणा तथा इंदौर मध्य प्रदेश के प्रमुख लघुकथाकार व समीक्षक पुरुषोत्तम दुबे ने लोककथा विधा के स्वरूप स्थिति और विकासक्रम पर प्रकाश डाला तथा तथा पठित लघुकथाओ की समीक्षा प्रस्तुत की। समारोह में अलीगढ़ उत्तर प्रदेश के डॉ. संतोष कुमार शर्मा द्वारा रचित डॉ. रामकुमार की लघुकथाओं में यथार्थवाद शोध-ग्रंथ का विमोचन मंचस्थ अतिथियों द्वारा किया गया।
यह हुए पुरस्कृत-सम्मानित:- इस भव्य और ऐतिहासिक समारोह में नेपाल अकादमी काठमांडू की पत्रिका समकालीन साहित्य के संपादक तथा नेपाली लघुकथा के प्रथम शोधार्थी डॉ. पुष्करराज भट्ट को अंग वस्त्र, स्मृति चिह्न, सम्मान पत्र और ₹11000 की राशि भेंट कर डॉ. मनुमुक्त मानव अंतरराष्ट्रीय लघुकथा पुरस्कार से नवाजा गया। इसके अतिरिक्त लघुकथा विधा के विकास में विशिष्ट, महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय योगदान के दृष्टिगत तीन दर्जन लघुकथाकारो को डॉ. मनुमुक्त मानव लघुकथा-गौरव सम्मान प्रदान किया गया, जिसमें काठमांडू के ओमश्रेष्ठ रोवन, बारा के नवराज रिजाल और भक्तपुर नेपाल के ध्रुव मधिकर्मी तथा हरिप्रसाद भंडारी, पटना (बिहार) के डॉ. सतीशराज पुष्करणा, ब्यावर के मोहन राजेश राजगढ़ के डॉ. रामकुमार घोटड तथा अजमेर राजस्थान के गोविंद भारद्वाज, नई दिल्ली के हरनाम शर्मा, जालंधर के सिमर सदोष और बरेटा पंजाब के जगदीश राय तथा बूटासिंह सिरसीवाला मथुरा उत्तर प्रदेश के डॉ. अजीव अंजुम , सुंदर नगर हिमाचल प्रदेश के कृष्णचंद्र महादेविया, भोपाल की कांता राय, इंदौर मध्य प्रदेश के पुरुषोत्तम दुबे, अंतरा करवड़े तथा डॉ. वसुधा गाडगिल , गुरुग्राम के अशोक जैन तथा विभा रश्मि, सिरसा के डॉ. रूप देवगुण, मेजर शक्ति राज कौशिक डॉ. शील कौशिक तथा डॉ. आरती बंसल, घरौंडा के राधेश्याम भारतीय, दादरी के डॉ. अशोक कुमार मंगलेश और नारनौल हरियाणा के डॉ. चितरंजन मित्तल आदि के नाम शामिल हैं।
यह रहा सम्मेलन का निष्कर्ष:- इंदौर मध्यप्रदेश के विष्णु गाडगिल और सचिन करवड़े , गुरुग्राम हरियाणा के प्रो आर के भटनागर, जिला बाल कल्याण अधिकारी विपिन शर्मा, पार्षद व निगरानी समिति के चेयरमैन महेंद्र सिंह गौड़, जिला युवा समन्वयक महेन्द्र नायक, डॉ. कांता भारती तथा वरिष्ठ लघुकथाकार सत्यवीर मानव आदि गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में संपन्न हुए इस सम्मेलन में कथा परिवार की एक विधा बताते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत किया गया था अपने लघु आकार में विराट भावों को सँजोए रखती है। यह वर्तमान को युग की विद्रूपताओं को उघाड़कर उन पर जोरदार प्रहार करती है। अतः इसे समकालीन दौर की सर्वाधिक लोकप्रिय और महत्वपूर्ण साहित्यिक विधा माना जा सकता है।
-0-डॉ.कांता भारती,571, हुडा सेक्टर-1,नारनौल