जून 2026

देशइच्छा     Posted: November 1, 2017

छठा पुरस्कार   प्राप्त  लघुकथा 

पति मुस्कुराता हुआ अपने   मोबाइल पर फटाफट  उँगलियां दौड़ा   रहा  था! उसकी  पत्नी बहुत देर से उसके  पास बैठी खामोशी   से  देख रही थी, जो  उसकी रोज़ की आदत  हो   गई थी और   जब भी  कोई   बात अपने पति से करती तो  जवाब ‘हाँ’  ‘हूँ’ में  ही  होता या नपे-तुले  शब्दों  में!

“किससे चैटिंग कर रहे  हो?”

“फेसबुक फ्रेंड  से।”

“मिले हो कभी अपने इस फ़्रेण्ड से?”

“नहीं”

“फिर भी  इतने मुस्कुराते  हुए  चैटिंग करते हो?”

“और क्या  करूँ बताओ?”

“कुछ   नहीं, फेसबुक पे आपकी  महिला  मित्र भी बहुत -सी होंगी ना?”

“हूँ”

उँगलियों को  हल्का -सा विराम दे   मुस्कुराते हुए  पति ने हुंकार भरी!

“उनसे भी यूहीं   मुस्कुराते  हुए  चैटिंग करते हो, क्या आप सभी को   भली-भांति जानते  हो?”

पत्नी  ने मासूमियत भरा  प्रश्न पर प्रश्न किया!

“भली-भांति तो  नहीं  मगर रोजाना  चैटिंग  होते-होते बहुत  कुछ हम आपस में  एक दूसरे  को  जानने लगते  हैं  और   बातें ऐसी होने लगती हैं  कि मानो बरसों  से जानते  हो  और  मुस्कुराहट  होठों  पे आ  ही जाती   है,  अपने -से लगने लग जाते हैं  फिर  ये!”

“हूँ  और  पास बैठे पराये -से!”  पत्नी हुंकार  सी भरने के  बाद  बुदबुदाई!

“अभी  मजे़दार  टॉपिक चल रहा है   हमारे ग्रुप में! अरे, अभी तुमने क्या  कहा  था, ध्यान नहीं  दे  पाया! बोलो ना  फिर  से, अरे, यार किस  सोच डूब   गईं।”

पति मुस्कुराता हुआ तेज़ी से  मोबाइल  पर अपनी उँगलियाँ  चलाता। हुआ एक नज़र   पत्नी पे डाल बोला!

“किसी  सोच में  नहीं!  सुनो, बस मेरी  एक इच्छा  पूरी  करोगो?”

पत्नी टकटकी  लगाए बोली!

“क्या अब तक  तुम्हारी कोई अधूरी इच्छा रखी  है  मैंने? खैर,  बोलो क्या चाहिए?”

“मेरा  मतलब ये   नहीं  था, मेरी   हर इच्छाएँ आपने  पूरी की   हैं  मगर ये  बहुत  ही अहम है!”

“ऐसी बात तो  बोलो  क्या  इच्छा?”

“एंड्रॉयड  मोबाइल”

“मोबाइल! बस इनती- सी बात,  ओके डन!  मगर क्या  करोगी बताना चाहोगी?” पति चौकता  बोला!

पत्नी  ने  भीगी पलकों से  प्रत्युत्तर दिया! “और  कुछ  नहीं, चैटिंग के  ज़रिये आप मुझसे भी  खुलकर बातें तो  करोगे!”

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