अत्यन्त धनी आदमी, पहली बार आलू खरीदने के लिए सब्जी मंडी पहुँचा। एक किलो खरीदने थे पर उसे आलू इतने पसंद आए कि बोल पड़ा- क्यों भाई, हम ये सारे आलू खरीद लें तो?
”बहुत अच्छा होगा साबजी। पूरे छब्बीस किलो आलू हैं। पाँच सौ बीस की जगा चार सौ सत्तर लगा दूँगा, आपको। बोहोत अच्छी बोहनी हो जाएगी आपके हाथ से।
”हा हा हा’ धनी आदमी हँसा, एक हजार रुपए का नोट सब्जी वाले को दिखाया और बोला, ”पर एक प्रॉब्लम है यार, छुट्टे नहीं हैं। हम तुम्हारी सारी सब्जियाँ खरीद लें तो?’
”ये तो और भी अच्छा होगा हुजूर’ सब्जीवाला बैठे-बैठे मुस्कुराता बोला, ”मैं तो अभी का अभी फीरी हो जाऊँगा। जय हो आपकी।’
धनी आदमी चारों ओर नजर दौड़ाता, नोटों से भरा सूटकेस आधा खोलता बोला, ”क्यों न हम ऐसा करें, ये सारी सब्जी मंडी ही खरीद लें तो?’
”माई बाप’सब्जी वाला उठकर खड़ा हो गया, हाथ जोड़ता बोला, ”आप तो सरकार हो, जो चाहे कर सकते हो, जो चाहे खरीद सकते हो।’
”अब समझे तुम हमें। तुम वाकई समझदार हो।’
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* अफवाहों के अनुसार पूरी दुनिया को चलाने वाला अति धनी वर्ग।