“तुम?”
दोनों के मुख से एक साथ निकला और दोनों एक दूसरे को देखते रह गए एकटक। दीप्ति ने एकाएक अपनी आँखें झुका लीं।
“कहाँ जा रहे हो?”
“बस घूमने के लिए हरिद्वार जा रहे हैं।”
“अकेले ही।”
“नहीं परिवार के साथ जा रहे हैं।”
“वह कहाँ है?”
“वह सब पीछे बैठे है सीटें अलग अलग मिली है।”
“और तुम?”
“मैं अपनी बेटी के साथ जा रही हूँ।”
“कहाँ है बेटी?”
“वह रही!”
सीट के नीचे बैग को रखते हुए लड़की की ओर इशारा किया।
“अच्छा यह तुम्हारी बेटी है!”
“हाँ यही है… नमस्ते करो बेटे… !”
नमस्कार की मुद्रा में उसने मुझे अभिवादन किया और मैने भी उसके सर पर हाथ रख कर आशीर्वाद दिया। और हँसकर कहा-“बिलकुल तुम्हारी कॉपी है। तुम भी…!! इसके आगे मैं बोल नही पाया। बस उन दोनों को देखता रहा कितनी ही यादें ताजा हो गई थीं। शायद उस को भी बहुत कुछ याद आ गया था।
इतने में मेरी बेटी भी हाल पूछने के लिए आ गई थी।
“ठीक हो न पापा… कोई मुश्किल… किसी को कह कर सीट एडजस्ट करवाऊँ…।” एक ही सास में बेटी कह गई।
“तुम लोग सैट हो गए वहाँ..!”
“हाँ चिंता न करे कोई जरूरत हो तो फोन कर देना।”
“ठीक।”
उसके जाने के पश्चात् उसने पूछा-“क्या यह तुम्हारी बेटी है?”
“हाँ … अब इस की शादी कर दी है। बच्चों के साथ जा रहे थे तो मुझे भी जबरदस्ती से तैयार कर लिया। मैं इंकार करता रहा; परन्तु इन्होंने मेरी सीट को भी बुक करवा दिया। इसलिए सीट नम्बर अलग से आ गए।”
वह कुछ बोली नहीं। बस देखती रह गई। उस की बेटी आखें बन्द कर के कान में स्पीकर लगा कर कुछ सुन रही थी … अपनी ही धुन में…।”
“कितने वर्षों के बाद देखा है तुम्हें!”
“हाँ…शायद चालीस वर्ष बाद ..।”
“पहचान लिया…।”
“पहले तो पहचान नहीं पाई; परन्तु जब पास से देखा तो एकदम हैरान रह गई।”
“वह साथ नहीं आए?”
“उन को छुट्टी नहीं मिली थी। इसकी शादी तय की थी। सोचा- एक बार इसे स्नान करवा दे… और घर भी अकेला नहीं छोड़ सकते थे।”
फिर लम्बी खामोशी.. बीच बीच में एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा देते थे।
“एक बात पूछूँ, बुरा तो नहीं मानोगी।”
“पूछो..?”
“क्या तुमने मुझे कभी याद किया था…?”
“यही प्रश्न मैं तुम से पूछने वाली थी।”
हम दोनों के बिना उत्तर दिए ही एक दूसरे के उत्तर हमें मिल गए थे।
“एक बात ओर पूछूँ…?”
“पूछो…?”
“क्या तुम…मुझसे….” आगे का बात उस की आँखों के भाव ही सब कुछ कह गए।
“हाँ… शायद…।” उसकी आँखें सब कुछ कह गई थीं ।
इसके आगे मैं उस से कुछ पूछ नही सका और न ही उसने कुछ पूछा।
कितनी ही पुरानी यादों में खोया रहा… शायद वह भी…।
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