जज द्वारा दिए गए फैसले पर जब दोनों पक्षों के वकीलों ने हस्ताक्षर कर दिए तो जीतनेवाले पक्ष के लोग कमल की माफिक खिल उठे।
हारनेवाले पक्ष के वकील ने कहा, ‘‘मुझे दुख है रामजीलाल, मैं तुम्हारा केस बचा न सका।’’ और वह तेजी से अपनी बस्ती की ओर चला गया। रामजीलाल के चेहरे पर विषाद और बरबादी के एवज में वकील के प्रति क्रूर भाव उभर आए थे। इतने महँगे और प्रसिद्ध वकील ने अंतिम दम पर कैसी बोगस बहस की थी! घर खाली कराने के आदेश पर वह कम से कम एक माह की मोहलत तो ले ही सकता था।
‘‘यार, मुझे रामजीलील के हार जाने का बड़ा दुःख है। अगर तुम्हारा दबाव नहीं होता तो नत्थू उससे कभी घर खाली नहीं करवा सकता था।’’ यह बात रामजीलाल के वकील ने जीतने वाली पार्टी के वकील से कही।
‘‘वो तो ठीक है मिस्टर खुराना, पर इस बात के लिए आपको पूरा पाँच हजार कैश भी तो मिला है। आखिर तुम इतने दुःखी क्यों हो? न जाने कितने गरीब रामजीलालों को तुम इसी तरह हरवा चुके हो!’’
इस पर मिस्टर खुराना ने ताजे खाए पान की ढेर सारी पीक को लापरवाही से एक ओर थूक दिया, जिस कारण अनेक बेकसूर चींटियाँ उस तंबाकू की पीक में जिंदा रहने की कोशिश करती हुई बिलबिलाने लगीं।
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