औकात
शर्मा जी को इस ऑफिस में आए अभी पन्द्रह दिन ही हुए थे कि उन्हें कम्पनी के लिए माल खरीदने हेतु दिल्ली जाना पड़ा। जो एक बार दिल्ली जाता है तो वह वहाँ से मालोमाल होकर आता है। मैं इस ऑफिस में आए अब तक के सभी साहब लोगों के इतिहास से भली-भॉति परिचित हूँ।
शर्मा जी माल खरीदकर आज ही आफिस पहुँचे ,तो मैंने बातों ही बातों में पूछ लिया-‘‘साहब जी ! कैसा रहा दौरा…?’’
‘‘ ठीक रहा। ’’ संक्षिप्त -सा जवाब था शर्माजी का।
मैं जो जानना चाहता था, वह बात जब तक न जान लूँ मुझे चैन आने वाला न था।, इसलिए बात को फिर से शुरू करने के लिए कहा,‘‘सर, उन लोगों ने कुछ सेवा -पानी….?’’
‘‘अरे, छोड़ उनकी बातें ….वे मुझे मेरी औकात दिखाने चले थे, पर, मैंने उन्हें उनकी औकात दिखा दी।’’ ऐसा कहते हुए शर्मा जी की आवाज में जोश था।
‘‘माल रिजैक्ट कर दिया, सर ?’’
‘‘माल तो पास कर दिया। पर, जब मैंने माल पास किया तो वे नोटों से भरा पैकेट मुझे पकड़ाते हुए कहने लगे,‘‘सर… ये आपके लिए….’’
मैंने कहा,‘‘ मैं तो लेता नहीं।’’
‘‘सर, सभी रखते हैं…रख लीजिए।’’
‘‘मैं मुफ्त के पैसे नहीं लेता।’’ इस बार मैंने कुछ क्रोधित होते हुए कहा था।
यह सुनकर वह अपने मालिक के पास पहुँचा जो थोड़ा-सा हटकर ही बैठा था। बोला सर, वे साहब पैकेट लेने से मना कर रहे हैं….
‘‘ पता है उनके मालिक ने क्या कहा?’’
‘‘क्या सर?’’मेरी जिज्ञासा चरम पर थी।
मालिक ने कहा, मुझे पता है इनकी औकात…इसमें कुछ नोट और रख दीजिए…फिर देखना।’’
बात मेरे कानों में पड़ चुकी थी। उसके बोल मेरे कानों में मानो तेजाब डाल गए हो।पर ,मैं क्या कर सकता था ।वह अपने किसी अनुभव पर ही यह बात कह रहा होगा। वह जब तक मेरे पास आता ,मैं उठकर चल दिया। जब मैं दरवाजे के पास पहुँचा तो वह दौड़ता-सा आया और मेरे सामने खड़ा हो गया और पुनः विनती करने लगा।
इसी बीच मेरी नजर सड़क पर भीख मागते एक भिखारी पर पड़ी। मैंने कहा,‘‘ उस भिखारी को देख रहे हो, यह पैकेट उस भिखारी को दे आओ।’’
‘‘ कैसी बातें करते हैं सर… ये आपके लिए है।’’
‘‘इसलिए तो कह रहा हूँ।’’
‘‘सर, आप नहीं रखना चाहते तो….मत रखिए…’’ और इतना कह वह पैकेट वापिस अपने मालिक के पास ले गया।
शर्मा जी ये सब बता रहे थे मैंने देखा ऐसा बताते हुए उनके चेहरेे पर एक गर्वित मुस्कान तैर रही थी, जो मैंने आज तक इनसे पहले आए किसी भी अधिकारी के चेहरे पर देखने को नहीं मिली।
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जून 2026
संचयनऔकात Posted: March 1, 2015
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