लूटा हुआ माल प्राप्त करने के लिए पुलिस ने छापे मारने शुरू किए।
लोग डर के मारे लूटा हुआ माल रात के अँधेरे में बाहर फेंकने लगे। कुछ ऐसे भी थे कि जिन्होंने अपना माल भी मौका पाकर अपने से अलग कर दिया ताकि कानून के पंजे से बचे रहें।
एक आदमी के सामने एक समस्या उठ खड़ी हुई-उसके पास चीनी की दो बोरियाँ थीं ,जो उसने पंसारी की दुकान से लूटी थीं। एक तो ज्यों-ज्यों रात के अँधेरे में पास वाले कुएँ में फेंक आया। लेकिन जब दूसरी उठाकर उसमें डालने लगा तो खुद भी साथ चला गया।
शोर सुनकर लोग इकट्ठे हो गए। कुएँ में रस्सियाँ डाली गईं। दो जवान नीचे उतरे और उस आदमी को बाहर निकाल लिया, लेकिन कुछ घंटों के बाद वह मर गया।
दूसरे दिन जब इस्तेमाल के लिए लोगों ने कुएँ से पानी निकाला तो वह मीठा था।
उसी रात उस आदमी की कब्र पर दिए जल रहे थे।
(सियाह हाशिए: सम्पादक-नरेन्द्र मोहन)