जून 2026

भाषान्तरकाग–भगोड़ा/ ध्राह्     Posted: July 1, 2024

हिमाचली अनुवादः अशोक दर्द

किसान बड़ा परेशान होई गिया। हरिया भरिया फसला गी नील  गौआँ अते सूअर तबाह करी जंदे। इनाँ छा बचदी फसल पकदी ताँ चिड़ियां चुगी जंदियाँ ।किसाने लम्मे बांसे पुर ध्रा टंगी करी बी दिक्खी लिया। चिड़ुआँ पखेरुआँ जानवरां पुर कोई असर नहीं होया ।

किसान इक्क दिन शहर था गिया दा । भीड़ कुसे नेते दा पुतला जलाणा चांह्दी थी। पुलसा लाठीचार्ज करीता।पुतला छड्डी करी भीड़ नह्ट्ठी गेई।

पुलसा वाल़ेयाँ दी खुशामद करी ने किसान उस पुतले ई लेई आया अते अणी करी अपणे खेतरे च टंगी दित्ता।

हूण डरे दे मारे कोई बी जीवजंतु खेतराँ पास्से आणे दी हिम्मत नी करदा।।

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