जून 2026

देशकारण     Posted: July 1, 2020

            सड़क पर हल्का प्राकृतिक प्रकाश था। पत्नी के साथ मित्र के घर में प्रवेश करने के लिए जैसे-ही उन्होंने दरवाजा पार किया, जीने पर घुप्प अंधेरा नजर आया। बाहर के हल्के प्रकाश ने पाँच-छह सीढियाँ  चढ़ने में मामूली मदद की, लेकिन आगे घना अंधकार पसरा दिखाई दिया।

            वे कुड़कुड़ाए, ‘‘ऐसे अंधेरे में तीन मंजिल कैसे चढ़ेगे?’’ मैंने कहा ‘टार्च लाई हो?’ प्रश्न तो कर दिया पर वे जानते थे कि पत्नी टार्च नहीं लाई होगी, पता नहीं कब से उसके सेल खत्म पड़े हैं।

            पीछे चल रही पत्नी से संक्षिप्त उत्तर दिया, ‘नहीं।’ उन्हें लगा जैसे अंधकार और घना हो गया।

            पत्नी ने बड़ा साहस करके ‘नहीं में उत्तर दिया था क्योंकि वह जानती थी कि पति देव ‘न’ सुनने के आदी नहीं हैं। इसी ऊहपोह में विलंब हुआ था। तब तक वे लोग अंधेरे में टटोल-टटोल कर एक मंजिल पार कर गए।

            दूसरी मंजिल पर कदम रखते-रखते वे टार्च की बात भूल गए। अब उन्हें अपने मित्र पर भुन्नास आने लगी, सो बड़बड़ाए, ‘ये श्याम भी अजीब खड़ूस  आदमी है, जीने में एक बल्ब भी नहीं लगवा सकता।’

            ‘‘बल्ब शायद लगा हैं पर हो सकता है बत्ती न हो..”

“बत्ती नहीं एलीमेंट होता है।’’

            पत्नी कुढ़ गई, ‘‘मैं बिजली की बात कर रही हूं दीपक की बत्ती की नहीं।’’

            ‘पत्नी ने उनके हँसने की आवाज सुनी। उसे लगा वह मूर्ख बनाई जा रही है।

            दो मंजिलें पार करने के बाद उन्होंने कहा, ‘‘लीजिए टार्च, बल्ब, दीपक जैसे रोशनी के उपादानों की चर्चा के सहारे हम अंतिम लक्ष्य से कुछ ही दूर रह गए हैं। पर प्रकाश की माँ , एक बात तो बताओ, तुम टार्च लाना कैसे भूल गई । तुम्हारी भूलने की आदत तो नहीं है।” उन्हें मालूम था कि टार्च में सेल खत्म होने की बात पत्नी को नहीं मालूम है।

            ‘‘नहीं मैं भूली नहीं हूँ । इस शहर में पिछले दो माह से चैबीस घंटों में एक मिनट को भी बत्ती,मेरा मतलब बिजली, नहीं गई तो मैंने सोचा आज भी टार्च ले चलना फिजूल हैं”

            ‘‘कौन-सी बड़ी तरक्की कर ली है हमारे इस छोटे-से शहर ने जो उसे अबाधित बिजली मिल रही है,’’ उन्होंने जिज्ञासा प्रकट की ।

            ‘‘तरक्की की तो मैं नहीं जानती पर यह जरूर मालूम है कि प्रदेश के बिजली मंत्री हमारे ही शहर के हैं इसीलिए…। पर पता नहीं आज क्या हो गया हैं?’’

            इतने में तीसरी मंजिल स्थित श्याम का घर आ गया। सामने के कमरे का दरवाजा खुला था, मोमबत्ती का हल्का प्रकाश अंधकार को लील चुका था। ट्रांजिस्टर सुन रहे श्याम ने लपक कर अध्यागतों का स्वागत किया। सभी लोग यथास्थान बैठ गए। श्याम को भी अचानक बिजली चले जाने का कारण समझ में नहीं आ रहा था। बोला, ‘‘भाई साब! पता नहीं क्यों बिजली चली गई है। गत दो महीनों में पहली बार आज बत्ती गई है।”

            ट्रांजिस्टर से गानों का प्रसारण समाप्त हो गया। एक स्वर उभरा, ‘‘अब आप प्रादेशिक समाचार सुनिए। यह आकाशवाणी का…केंद्र है। पहले मुख्य समाचार-प्रदेश के बिजली मंत्री ने आज सुबह त्यागपत्र दिया, त्याग पत्र राज्यपाल द्वारा स्वीकृत…।” श्याम ने हाथ बढ़ाकर ट्रांजिस्टर बंद कर दिया।

            अचानक बिजली जाने का कारण तत्काल सबकी समझ में आ गया।

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