टॉफी का कारोबार था। बहुत बड़ा कारोबार!
उस कारोबार के बोर्ड की मीटिंग थी।
वैसे तो मीटिंग में सारे डायरेक्टर साहेबान थे; लेकिन एक मैनेजिंग डायरेक्टर था,यानी एम डी!
नियम के मुताबिक सबको अपनी बात कहने का हक़ था; लेकिन केवल एम.डी. साहब बोलते और सवाल पूछते। बाकी सब सुनते और जवाब देते।
“गए साल के बिक्री और मुनाफ़े के नतीजे बड़े अच्छे आए हैं! मेरी दूरगामी सोच और हार्डवर्क का नतीजा है यह!” एम डी साहब यानी बॉस कहते हुए भावुक हो गए और फिर आधा घंटा अपने बचपन की गरीबी और माँ के त्याग पर बोलते रहे,”शी यूज्ड टू कुक ऑन केरोसीन स्टोव फ़ॉर अस!”
बॉस ने आँसू पोंछे। सबने तालियाँ बजाईं!
“अगले साल के लिए प्लान!”-बॉस मुद्दे की बात पर आ गए थे।
“सभी वर्कर्स का फ्री मेडिकल चेकअप!”
तालियाँ
“वर्कर्स की तनख्वाह दुगनी!”
“तालियाँ
“स्वास्थ्य-वर्धक टॉफियाँ शुरू की जाएँगी!”
“पर्यावरण को फायदा पहुँचे ऐसी पेकिंग!”
तालियाँ
मीटिंग वाहवाही पर खत्म हुई। सबने कहा बॉस हो तो ऐसा!
अपने ऑफिस में बैठे बॉस सेक्रेटरी को डिक्टेशन दे रहे थे।
“फ्री मेडिकल चेकअप में जो वर्कर बीमार निकले, उसका हिसाब करके निकाल दो।”
यस बॉस
“वर्कर्स की तनख्वाह दुगनी करके काम का लोड तीन गुना कर दो!”
“शहद, तुलसी, मुलहठी और जड़ी-बूटियों के फ्लेवर वाली टॉफियाँ निकालो। टॉफियों का वजन आधा कर दो और दाम दुगना! पचास पैसे वाली टॉफी एक रुपये की! एक वाली दो की! सो ऑन!”
यस बॉस
“टी वी, सोशल मीडिया के विज्ञापन के लिए क्रिकेटर और फ़िल्म स्टार बुक करो।और हाँ विज्ञापन में धर्म और राष्ट्र का एंगल फिट करो। एक चीज का ध्यान रहे फ़ौजी हमारी राष्ट्रवादी टॉफी खाकर देश की सीमाओं की रक्षा करें, ऐसा विज्ञापन बनवाओ और बार-बार चलाओ!”
यस बॉस
“पैकिंग डिपार्टमेंट बंद करके एनवायर्नमेंटल फ्रेंडली पैकिंग बाहर से करवाओ! हाँ ध्यान रखना! मेरे साले साहब की भी एक फर्म है पैकिंग की!”
यस बॉस
ए सी आफिस से पसीना पोंछता सेक्रेटरी बाहर निकला।
“बॉस टॉफी की कंपनी चला रहा है या देश?”
सेक्रेटरी मन ही मन बुदबुदाते हुए अपने काम में लग गया।
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