जब उसने बैलों को खेतों की तरफ हाँका, तब उसे लगा कि उसमें असीम शक्ति है। वह बहुत कर सकता है! बहुत कुछ। जब उसने बीज बोया! तब उसे लगा कि उसने अपने दिल से छोटा हिस्सा खेत में बिखेर दिया। जब उसने सिंचाई की! तब उसे लगा अपना स्नेह बहा दिया। और फिर अंकुर फूटे-उसके सपने जन्मने लगे। और फसलें लहलहाने लगीं, तो उसके सपने लहलहाने लगे। उसे लगने लगा कि समूचा आकाश रंगीन तारों सहित उसके खेतों में उतर आया है।
फसल लाद कर घर से बैल-गाड़ी हाँकने लगा तो पत्नी ने अपनी फरमाइशें रख दीं। वह मुस्कराता रहा। मंडी में उसने बैलगाड़ी रोकी तो उसे महसूस हुआ मानो किसी श्मशान में आ रुका है! जहाँ छोटे-बड़े गिद्ध पहले से उसकी प्रतीक्षा कर रहे हैं।
फसल बिकी-हिसाब बना।
जाने किसने बेईमानी की थी। वह उधार के हाथों नकद का दाँव हार गया। ब्याज के हाथों मूल गँवा आया। वह फिर खाली हाथ था। फटे हाल था। बैल भूखे थे। वह लालपरी के संग कोई लोक-संगीत गुनगुनाता हुआ वापिस जा रहा था। और उसे लग रहा था कि आकाश बहुत ऊँचा है तथा तारे कितने फीके हैं! रात कितनी अजब अँधेरी है। गाँव तक पहुँच पाएगा कि नहीं?