जून 2026

देशकैमिकल लोचा     Posted: February 1, 2024

 जाने कौन- सा केमिकल लोचा घट रहा था चंपा के अंदर कि वह बसा बसाया घर और भोलेराम को छोड़कर ‘किसी और’ के साथ चली गई थी!! और तो और बच्चों का भी नहीं सोचा!  जाने क्यूँ तो अचानक ही घर छोड़ गई थी चंपाकली! ‘फलाँ की पत्नी फलाँ के साथ फरार!’ वाली खबरें तो बहुत पढ़ीं थीं भोलेराम ने लेकिन चंपा के लिए इस तरह “फरार” या ‘फुर्र’ होने जैसे शब्दों का प्रयोग करना बिल्कुल पसंद नहीं आता था उसे।  आखिर पत्नी रही थी उसकी।  कैसे तो उसे क्रोध भी नहीं आया चंपा पर।  भावहीन-  सा हो गया था।  हाँ! हर शाम चंपा की नई गृहस्थी जरूर देखता।  शाम ढले भोलेराम हर रोज रिक्शा चला लेने के बाद चंपा की गृहस्थी को दूर से निहारता रहता।  आखिर कुछ दिनों पहले तक दोनों साथ ही तो रहते थे। वैसी ही ईंट और टाट की झोपड़ी, वैसे ही नगर-  निगम के नलके से पानी ढो- ढोकर लाना और उस जैसा ही रिक्शा चलानेवाला आदमी! भोले को कोई अंतर ही नहीं दीखता; लेकिन हर शाम चंपा के नए घर में ताक- झाँक की उसकी आदत ने उसे भी चंपा की गृहस्थी का एक हिस्सा बना दिया था।  तभी तो लगातार कई दिनों से एक ही साड़ी पहने चंपा की कपड़ों की कमी पहचान गया वह।  अपनी झोपड़ी में आ चंपा के बक्से को खोला।  एक ही कपड़े में चली गई थी पगली! भोला के चेहरे पर हल्की मुस्कुराहट फैल गई।  चंपा के सारे कपड़े बाँध उसके नए घर पहुँच गया-  “हर रोज एक ही साड़ी मत पहना करो।” चंपा ने भोलेराम को यूँ अचानक आया देखा, तो सकते में आ गई।  उसे जल्दी वापस चले जाने को कहा।  भोलेराम ने चंपा को उसकी साड़ियों की पोटली थमाई और यूँ छुपकर निकल भागा जैसे उसका कोई नया प्रेमी हो!

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