“बता सकते हो, कल मैं तुमसे क्यों नहीं लड़ी?”
“अरे हाँ, कल तो मैंने तुम्हें मार्केट में डाँट दिया था, फिर भी घर लौटकर तुम लड़ी नहीं, ये तो कमाल ही हो गया! 26 साल के वैवाहिक जीवन में ऐसा कभी नहीं हुआ, इसे तो स्वर्णाक्षरों में लिखा जाना चाहिए।”
“अच्छा, चलो तुम ही बता दो देवी कि मुझ पर ऐसी कृपा क्यों कर की?”
“क्योंकि जब अपन वापस आए, तो तुम तो ऊपर चले गए थे और मैं बच्चों के साथ बैडमिंटन खेलने लगी थी। मूड फ्रेश हो गया। लड़कपन की याद आ गई।”