जून 2026

भाषान्तरक्रांति के बाद/ क्रांति का बाद     Posted: July 1, 2025

गढवाली अनुवादः डॉ. कविता भट्ट 

तेज बथौं कि वजै सि, मैहला  द्वार – मोरि खड़ाक–खड़ाक की आवाज करिक खुल गेनि।

हॉल म सज्यां फानूस, थरथराण लगि गेन।

पाळि पर टँगी फोटु, संगमरमरा मिळवटा मां पड़ी गे अर सीसा, चटकी कि चूर–चूर ह्वे गे।

पाळि पर यकी कील दिखेणी छै।

कुछ मैना इ ह्वे होला।

तेज बथौं, हॉल म कै तरौं सि फिर भितर ऐ गे। वे थैं हॉल म एक पैलि पछांणक कील दिखे।

कील पर पैलि से बड़ी फोटु टँगी छै।

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