जून 2026

चर्चा मेंचर्चा है     Posted: November 1, 2020

कथादेश का नवम्बर 2020 का अंक पुरस्कृत लघुकथाओं पर केंद्रित

2-रामकुमार आत्रेय की प्रथम पुण्य स्मृति में कार्यक्रम का आयोजन

दिनांक 29-09-2020 को करनाल के मॉडल टाउन में हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा बालमुकुंद गुप्त सम्मान से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार स्वर्गीय रामकुमार आत्रेय की प्रथम पुण्यतिथि पर एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ लघुकथाकार  डॉ अशोक भाटिया ने की। सर्वप्रथम उपस्थित साहित्यकारों ने स्वर्गीय आत्रेय जी के चित्र पर पुष्प चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की ।मंच संचालन कर रहे राधेश्याम भारतीय ने बताया कि साहित्य की विभिन्न विधाओं में आत्रेय जी की लगभग दो दर्जन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं ।

सतविंदर राणा और मदन लाल ने आत्रेय जी की कालजयी लघुकथाएं ‘इक्कीस जूते’ और ‘एकलव्य की विडम्बना’ का वाचन किया और साथ में उनकी रचना प्रक्रिया के बारे में भी बताया जो कि ‘लघुकथा कलश’ के रचना प्रक्रिया अंक में प्रकाशित हुई थी कुरुक्षेत्र से पधारे अरुण कुमार, हरपाल एवं ओमप्रकाश करुणेश ने आत्रेय जी की कहानियों में आए कथ्य और शिल्प पर विस्तार से चर्चा की। अरुण कुमार ने बताया कि आत्रेय जी हर घटना से विसंगतियों को पकड़ कथाएं बुन लेते थे। वे कथाएं जहां समाज की विकृतियों पर प्रहार करती हैं,वहीं जीवन मूल्यों को भी पोषित करती हैं।

 हरपाल ने बताया की आत्रेय जी साहित्य जगत में एक आजातशत्रु के रूप में प्रसिद्ध रहे।

 ओमप्रकाश करुणेश ने बताया कि आत्रेय जी के साहित्य में हरियाणा की माटी की गंध महसूस की जा सकती है। मुख्य अतिथि के तौर पर पधारे उनके दामाद ओमप्रकाश ने उनसे  संबंधित कई संस्मरण सुनाए। उन्होंने कहा कि  उनमें दूसरों को परखने की अपार क्षमता थी । मुझे उनमें एक देवता की छवि नजर आती थी । 

इस अवसर पर भोपाल से कांता राय के संपादन में प्रकाशित ‘लघुकथा वृत्त’ के सितंबर अंक का विमोचन हुआ जोकि विशेष रुप से स्व. आत्रेय जी पर केंद्रित रहा । वहीं डॉ अशोक भाटिया द्वारा संपादित पुस्तक लघुकथा : आकार और प्रकार का विमोचन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉक्टर भाटिया ने आत्रेय जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर बोलते हुए कहा कि आज के समय में फकीर बनना, ईमानदार बनना एवं सच बोलना बड़ा मुश्किल काम है पर यह सब गुण आत्रेय जी में समाहित थे ।उनका सौम्य  व्यवहार हमें प्रभावित करता रहा। भाटिया जी ने आत्रेय जी की कालजयी रचना ‘ बिन शीशों का चश्मा ‘ में उनकी कल्पना शक्ति, रोचकता एवं मारक क्षमता पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर सुशील चावला एवं रामकुमार आत्रेय के परिवार से पहुँचे विकास  एवं अरविंद ने भी अपने विचार रखे। 

राधेश्याम भारतीय 

लघुकथा वृत्त का अक्तूबर 2020 का अंक नीचे दिए लिन्क से डाउनलोड कीजिए

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