मंदिर की सीढ़ियों से उतरते हुए संतुलन बिगड़ने पर अचानक दादी का चश्मा सीढ़ियों के किनारे बनी गंदी नाली में गिर गया। तभी नीचे खड़े सफाईकर्मी ने तुरंत नाली में हाथ डालकर चश्मा निकाला और साफ पानी मे धोकर मंदिर की सीढ़ियों पर रखकर खुद डरकर दूर खड़ा हो गया!
दादी का हाथ पकड़े 7 साल की मासूम ने दादी से सवाल किया- “क्यों दादी ये चश्मा तो अब अछूत हो गया न?”
आपको पाप लगेगा; क्योंकि रोज मंदिर से लौटने पर आप इन लोगों को सामने गुजरते देखकर अपने ऊपर गंगाजल छिड़कना नहीं भूलती।
पोती की बात सुनकर दादी ने सीढ़ियों पर रखे गीले चश्मे को अपनी सूती साड़ी के पल्लू से साफ किया और सफाईकर्मी को पास बुलाकर प्रसाद का लड्डू देते हुए बोली, लगता है अब तक गलत नम्बर का चश्मा पहनकर मंदिर आती थी। अब चश्मे से कुछ ज्यादा साफ दिख रहा है ।
दादी की बात सुनकर पोती ने उछल कर मंदिर की घण्टी बजा दी।
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