बेबी लगातार रोए जा रही थी। हुआँऽऽ-हुआँऽऽऽ का स्वर धीरे-धीरे ऊँचा होता हुआ घर के सभी बंद दरवाजों वाले कमरों में घुस गया। …और फिर धड़ाधड़ सभी दरवाजे खुले… दरवाजों से निकले कई जोड़ी चश्मे।
“क्या हो गया?”
“बेबी को क्या हो गया?”
परेशान हो सभी चश्मे मोबाइल में झाँकने लगे। गूगल सर्च इंजन ऑन हो गया।
“मस्ट बी हैविंग सम ब्रीदिंग इश्यू।”
“बेबी ने कितना एम. एल. मिल्क पिया था?”
“किस कंपनी का फार्मूला था?”
कुछ प्रश्न कुछ समाधान यहाँ-वहाँ भटकने लगे।
झुर्रियों वाली दो आँखों पर चढ़ा तजुर्बे का चश्मा मुस्कुराया बोला- “बेबी पेट की ओर पैर मोड़ रही है जरा सी हींग घोलकर नाभि पर लगा दो। बस कुछ ही देर में आराम मिल जाएगा।”
और बस कुछ ही देर में बेबी आराम से सो गई।
गूगल इंजन सर्च करते सारे चश्मों में से झाँकती छोटी-छोटी आँखें बड़ी होकर तजुर्बे के चश्मे को देख रही थीं।
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