(राजस्थानी में अनुवाद : अनिता मंडा)
स्टेशन क कने ठेलह पर स्यूँ दस साल को छोरो मुट्ठी भर भुनेड़ा चिणा उठा र भागण लाग्यो। चिणाआळो हेला मारया, “पकड़ो, पकड़ो, चोर!” छोरो जान लगार भाग्यो, पण लोग बिने पकड़ लियो। दो-चार चनपट कनपटी मह जड़ दिया। बी टेम भी थोड़ा चिणा बी रे मुण्डे मैं हा अर थोड़ा भीचेड़ी मुट्ठी मह हा। बिन पुलिस नह सूँप दियो। पुलिस आप’र तरीक हूँ पूछ्यो जणा बो बतायो क परस्यूँ ही गाँव हूँ आयो है। बी’रा माँ-बाप सामूहिक हत्याकांड मह सुरगाजी गया। दो दिनां स्यूँ भूखो हो, इण वास्ते ठेलह पर स्यूँ चिणा उठा लिया। पण पुलिस आळा बी’री बात कींकि सुणे। सींखचाँ के माँय बंद कर दियो। मोड़े ताणी सिसकतो रियो। भूख अर पीड़ क कारण मोड़े ताँई नींन कोनी आई। सोणहूँ पेली, आदत र हिसाब हूँ बो गळ मैं पड़ी सोन को पाणी चढ़ाएड़ी चैन म लटक री साईं बाब की फुलड़ी क हाथ लगार निमन करयो। दिन उग्यां नींबू टिकाण जीसी मुच्छयाँ आळो कांस्टेबल बिन डंडों मार र जगायो जणा आदत सारू बो साईं बाब न सिमरण करण न चैन टँटोळी। चैन बठे कोनी ही।
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