जून 2026

देशछू लिया     Posted: December 1, 2016

सुहासिनी ने दूर से सरसतिया को देखते ही मुँह में कपड़ा लपेटा। उसे लगता है – जब भी कोई भी सड़क से गुज़रता है ,तो सरसतिया जानबूझ ज़ोर-ज़ोर से झाड़ू मारकर धूल उड़ाती है। –

“पर इन लोगों के मुँह कौन लगे, कुछ कहा नहीं की सात पुश्तें तार देंगे।”

बड़बड़ाती हुई सुहासिनी ने कदम तेज़ किये।रोज हर सुबह स्कूल जाते समय दोनों की भेंट होती है।एक के मुँह पर जातिगत दर्प और खीझ झलकती तो दूसरे के चेहरे से गुस्सा और नफ़रत।गनीमत थी दोनों अपने -अपने म्यान में सिमटी रहतीं।हाँ कभी- कभी सरसतिया की बड़बड़ाहट उस तक ज़रूर पहुँचती।

” हमसे परे -परे जायेंगे? हम तो छूत की बीमारी हैं ना ?…”

जल्दी -जल्दी सरसतिया से दूर जाने की हड़बड़ी में सुहासिनी का पाँव जो मुड़ा तो दर्द से दोहरी हो वहीं गिर गई।ये देख सरसतिया ने हाथ का झाड़ू फेंक सुहासिनी को को थाम लिया,और खीँच-तान के पाँव की नस ठीक कर सहारा दे खड़ा कर दिया।

फिर मुस्कुरा कर बोली -“हमने छू लिया तुमको।”

” सच कहा, तुमने तो हमारे मन को भी छू लिया” सुहासिनी ने सरसतिया के धूल भरे हाथों को प्यार से पकड़ लिया।लगा एक अभेद्य दुर्ग ढह गया।

-0-

गतिविधियाँ

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)


    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´

    रचनाएँ भेजने के लिए ई-मेल-:-

    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-

    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    केवल स्वीकृत रचनाओं की ही सूचना दी जाती है।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine