“मम्मी मेरे पैर चादर से बाहर निकल रहे हैं ,तुम नई ला दो ना…… प्लीज़ । ”
पाँच वर्षीय पुत्र मिंकू भोर पाँच बजे ही नींद से उठकर बैठ गया ,उसने माँ की चादर देखी ,माँ के पाँव उनकी चादर के भीतर थे, क्योंकि वे पैरों को पेट की ओर सिकोड़ कर लेटी थीं ।
उसने माँ का कन्धा स्पर्श कर उन्हें जगा दिया । फिर रुआँसा हो कर बोला –
” मम्मी ! मेरे पैर चादर से बाहर निकल गए हैं , मच्छर भी बहुत काट रहे हैं । तुम नई कद्दर ला दो ना … प्लीज़ अम्मा । ”
माँ नींद में थी । उन्होंने हाँ , हूँ में जवाब दिया ।
मिंकू की बचपन की चादर वाकई में छोटी हो गई थी । वो उसे ओढ़ता तो उसके पाँव खुल जाते। .. ।
“माँ तुम्हारे पाँव भी चादर से बाहर आ जाते हैं क्या , ( फिर शिकायती लहज़े में बोला ) “चीटिंग मॉम…तुमने अपने पाँव मोड़ रखे हैं ।”
वो धीरे से बिछौने से उतर कर पापा के बिस्तर के निकट चला गया । पापा खर्रांटे लेकर बेसुध सो रहे थे । उनकी चादर उनके पैरों के नीचे गुड़ीमुड़ी हो कर दबी हुई ज़रा- सी नज़र आ रही थी ।
वो वापस मम्मी के पीछे जा कर लेट गया । माँ ने आँखें खोल कर बेटे मिंकू को देखा और धीरे से अधखुली आंखौं से देखत हुए मुस्कुरा दी । मन ही मन में माँ सोच रही थी ,हमारा बेटा अब समझदार हो गया है ।
दूसरी सुबह पापा – मम्मी साथ बैठ कर , घर खर्च का बजट बना रहे थे….उनमें बीच -बीच में बहस होने लगती । आखिर मम्मी ब्रेकफ़ास्ट के बाद बैग ले कर कहीं चली गईं थीं । मम्मी के जाने के बाद पापा ने होम वर्क करवा दिया । मिंकू सहमा सा ,कभी अंदर तो कभी बाहर घूम रहा था । वो कुछ गुमसुम था…।
बाहर सड़क पर टेम्पो रुकने की आवाज़ आई।मम्मी के हाथों में पैकेट थे । माँ ने मिंकू को रंग बिरंगी बड़ी चादरें दिखाईं। आज नईं चादरें देखकर वे तीनों देर तक खुश होते रहे ।
कम से कम उनके पाँव तो अब चादर के बाहर नहीं दिखलाई देंगे पर….. ।
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