जून 2026

देशजल संरक्षण     Posted: July 1, 2020

सीमा आज वह बहुत खुश थी। उसने प्रार्थना सभा में जल संरक्षण पर भाषण दिया था। भाषण सुनकर सभी ने जोरदार तालियाँ बजाईं। साथी अध्यापकों ने उसकी भाषण- कला की तारीफ की।

दुबेजी बोले- “वाह सीमा मैडम! क्या जबरदस्त भाषण था आपका, भई हम तो कायल हो गए हैं आपके, अरे भई शर्माजी! सबसे ज्यादा पानी तो आप ही बरबाद करते हैं पूरी कॉलोनी में, बारिश के मौसम में भी बगीचे में रोज पाइप से सिंचाई हो रही है, सीमा मैडम! जरा समझाइए इन्हें भी, आज सारा पानी ये बगीचे में गिराते रहे, तो कल इनके पोते- पोतियाँ प्यासे रह जाएँगे।”

कक्षा में सीमा मैडम ने विद्यार्थियों को जल-संरक्षण पर प्रोजेक्ट दिया। उनको निर्देश दिया कि वे अपने मुहल्ले में वर्षा-जल संरक्षण के बारे में लोगों को जागरूक करें।

जल संरक्षण पर विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए प्राचार्य ने सीमा के प्रयासों की सराहना की। सीमा स्कूल से गुनगुनाते हुए घर आई। घर आकर उसने पानी का मोटर ऑन किया, शॉवर खोला और आँखें बंदकर ठंडे पानी से थकान मिटाने लगी। तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। जल्दी-जल्दी गाउन पहनकर उसने दरवाजा खोला, देखा तो सामने पड़ोसन परेशान -सी खड़ी थी।

“मैडम आप अपना मोटर बंद कर दीजिए, मेरे यहां बिलकुल पानी नहीं आ रहा है।”

“पानी नहीं आ रहा है< तो मैं क्या करूँ? आप अपनी कोई और व्यवस्था कर लीजिए।”

“मैडम आपकी और हमारी पाइपलाइन एक है ; जब आप मोटर चलाती हैं, तो मेरे यहाँ पानी बंद हो जाता है।”

“ये आपकी प्रॉब्लम है। मैं क्या कर सकती हूँ ?´´

सीधी -सादी पड़ोसन अपना- सा मुँह लेकर वापस चली गई।

स्कूल का आखिरी कार्य- दिवस, कल से दो महीने की छुट्टियाँ हैं। जल-संरक्षण पर जन -जागरूकता अभियान चलाने के लिए सीमा को आज जिलाधिकारी महोदय के हाथों प्रशस्ति- पत्र मिला है। सीमा खुशी से फूली न समाई। तुरंत मिठाई खरीदी, घर आकर अपने पति और बच्चों को मिठाई खिलाकर खुशखबरी सुनाई। बच्चे छुट्टियों में नानी के घर जाने की खुशी में शोर मचाने लगे। जल्दी-जल्दी सामान पैक होने लगा। सीमा के पतिदेव टैक्सी लेकर आ गए। सीमा और उसका परिवार छुट्टी मनाने चला गया।

ठीक पाँच बजे सीमा के रसोईघर के नल से आवाज आई…सूँ  सूँ।

फिर बाथरूम के नल ने भी सिसकारी भरी। सभी नलों से पानी बहने लगा झर झर झर झर।

नलों का स्वच्छ पानी गंदी नाली में मिलकर बहने लगा और पूरे दो महीने तक बहता रहा।

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