जून 2026

पाठकीयजुलाई अंक-मेरी दृष्टि में     Posted: August 1, 2024

1- जो चीज़ लंबे चौड़े आख्यानों या व्याख्यानों से नहीं समझाई जा सकती उसे मात्र दो पंक्ति के दोहे या चौपाई से समझाया जा सकता है। इसे भक्ति काल के संत कवियों ने समझ लिया था। पंचतंत्र जैसी लोक कथाएँ भी इसीलिए जन्मी।

2- वैसे भी गम ए रोज़गार की दहलीज पर दस्तक दे रहे इस युग में साहित्य दोयम दर्जे पर आ गया है।

3- ऐसे में लघु कथा जैसी पत्रिका सफलतापूर्वक निकाल पाना अद्भुत साहस का काम है। सो हार्दिक बधाई तथा अभिनंदन

4- वर्तमान अंक देखें तो :

  • रोटी का सफ़र : आदमी के अंतस में मां के प्रति स्नेह, आदर्श और स्वाभिमान का दिग्दर्शन
  • तंत्र : व्यवस्था पर अद्भुत व्यंग
  • कारीगर : व्यवस्था के भ्रष्टाचार का उद्घाटन
  • प्राइमरी स्कूल: शिक्षा के क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार की सटीक बानगी
  • पिछड़ापन : संबंधों की पाकीज़गी पर पावन आलेख
  • सृजनहार : लेखकीय दोगलेपन का सत्यापन
  • अंतिम अस्त्र : पद प्रक्षालन एवं पद की परिक्रमा
  • वास्तविक पूजा : परजन हिताय परजन सुखाय

विजय जोशी (पूर्व समूह महाप्रबंधक, भेल)

गतिविधियाँ

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)


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    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´

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