जून 2026

भाषान्तरडर / डौर     Posted: August 1, 2025

गढ़वाली अनुवादः डॉ. कविता भट्ट

“माँ! यां मां डन्नै क्य बात च। तु एक बगत बोलिक त देख। अपड़ी पड़ै फिर से शुरू ही त कन्न चांदी।

“पर?”

“क्वी गलत काम कन्नौ थोड़ी जाणी छैं।  पिताजीन खै त नि देण त्वी थैं।”

“पर?”

“पर क्या…?”

उबारी ई कैका औणू कु सबद सुणे। नेहा न माँ थैं चुप रौण थैं सनकाई -“श्श्श्! इन लगणू  पिताजी ऐ गेनि!”

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