“माँ! इसमें डरने की क्या बात है। तुम एक बार कहकर तो देखो।अपनी पढ़ाई फिर से शुरू ही तो

करना चाहती हो।
“पर?”
“कोई गलत काम करने थोड़े जा रही हो। पापा कोई खा थोड़े जाएँगे।”
“पर?”
“पर क्या…?”
तभी किसी के पैरों की आहट सुनाई दी। नेहा ने माँ को चुप रहने का इशारा किया-“श्श्श्! लगता है पापा आ गए हैं!”
–0-डॉ. रंजना जायसवाल, लाल बाग कॉलोनी, छोटी बसही, मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश- 231001
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