क़लम और नम्बरों की टिकिट मेरे हाथ में थी ।
नम्बर बोले जा रहे थे , टू -फोर ट्वेन्टी फोर।
मेरे टिकिट में यह नम्बर दर्ज था। मैंने इसे खुशी-खुशी काटा। मेरी सर्विस लगने की तारीख ट्वेन्टी फोर थीं।
नेक्स्ट नम्बर वन वन इलेवन । यह नम्बर मेरी टिकिट में पाकर मैं फिर खुश था। ग्यारह तारीख़ को मेरी लकी तारीख़ है। इसी एक तारीख में सुबह मेरा इंगेजमेंट हुआ था और शाम में मेरा विवाह सम्पन्न हुआ था।
नेक्सट। टू नाइन ट्वेन्टी नाइन। यह नम्बर काटते हुए मुझे याद आया, उन्तीस तारीख को मेरा बैंक लोन पास हुआ था और मैंने शहर की पॉश कॉलोनी में डुप्लेक्स खरीदा था।
वन फोर फोर्टीन । चौदह तारीख को वैलेंटाइन डे पर मेरे मकान का वास्तु था।
टू फाइव ट्वेन्टी फाइव। मेरे परिवार में सबसे बड़ा खुशी का दिन था। इस दिन मेरी श्रीमती जी खुशी – खुशी मेरे वृद्ध माँ- बाप को गाँव से ले आईं थीं और अब हम सब साथ रह रहे हैं।
मेरी टिकिट के सब नम्बर तो कट न पाए, मगर मैं जीवन का तम्बोला जीत चुका था।
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