हिन्दुस्तान की तरह ही एक देश। दिल्ली की तरह ही उसकी एक राजधानी। बाबा खड्गसिंह मार्ग पर स्थित कॉफ़ी-हॉउस की तरह ही बैठकों का एक अड्डा। एक मेज पर छह बुद्धिजीवी सिर से सिर मिलाए गर्मागर्म बहस में उलझे हुए हैं। मैं बराबर की मेज पर अपना कॉफ़ी का प्याला लिये बैठा हूँ।
देश की अर्थव्यवस्था गर्त में जा रही है। नेताओं ने सारे देश को लूटकर खा लिया है। दुश्मन हमारे सैनिकों के सिर काट रहा है। सबसे बड़ा प्रश्न भ्रष्टाचार का है। तुम इतना चुप क्यों हो दोस्त…! मैं कुछ कहना नहीं, करना चाहता हूँ मेरे दोस्त…! मेरे प्याले की ठंडी हो रही कॉफ़ी में उबाल आने लगा है।
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