उस रात जब सब खाना खा चुके और राजू स्वभावानुसार अभी घर नहीं लौटा था, तो एकांत पाकर शीला ने बात शुरू की…”सुनो जी!राजू विवाह करना चाहता है।”
“राजू विवाह करना चाहता है?” मनोज ने पुष्टि करनी चाही।
“हाँ ।”
“मगर किससे?”
“उसके ही ऑफिस में काम करती है आरती,उसी से। आज सुबह ही उसने मुझे बताया। वह कोर्ट में जाकर कोर्ट -मैरिज करना चाहता है।”
“पर कोर्ट में …क्यों?”
” क्योंकि आरती ईसाई है।”
“और तुमने अनुमति दे दी?”
“उसने अनुमति नहीं माँगी थी।”
“फिर?”
“उसने सूचित किया है।”
“और तुमने कुछ नहीं कहा?”
“नहीं।”
“क्यों ?”
“मेरे कहने या न कहने का कोई अंतर नहीं पड़ता।
अब वह बच्चा नहीं है,बड़ा हो गया है।
वह जानता है कि हमारा विवाह किस प्रकार हुआ है…।
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