जून 2026

देशान्तरदो लघुकथाएँ     Posted: January 1, 2025

गाब्रिएल गार्सिया मार्केस की दो लघुकथाएँ 

 अनुवाद : अश्वनी कुमार 

एक 

लगभग पाँच साल एक बच्चा, जिसने मेले की भीड़ में अपनी माँ को खो दिया था, एक पुलिस अधिकारी के पास जाकर पूछता है: ‘क्या आपने ऐसी महिला को कहीं देखा है, जो मेरे जैसे बच्चे के बिना घूम रही हो?’ 

दो 

दो वर्षीय मैरी जो अँधेरे में खेलना सीख रही है। उसके माता-पिता मिस्टर और मिसेज माइ को उस छोटी लड़की के जीवन या उसके शेष जीवन के लिए अंधे होने के बीच चयन करने के लिए मजबूर किया गया था। जब छह प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने उसकी आँखों में रेटिनोब्लास्टोमा पाया, तो मेयो क्लिनिक में उस बच्ची मैरी जो की दोनों आँखें निकाल दी गईं। ऑपरेशन के चार दिन बाद, छोटी लड़की ने कहा- ‘माँ, मैं जाग नहीं सकती… मैं जाग नहीं सकती!’

(वागर्थ से साभार)

गतिविधियाँ

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)


    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´

    रचनाएँ भेजने के लिए ई-मेल-:-

    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-

    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    केवल स्वीकृत रचनाओं की ही सूचना दी जाती है।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine