जून 2026

देशधुँधली-सी तस्वीर     Posted: June 1, 2020

‘‘लो, चाय पियो।“चाय लाते हुए मैंने कहा।

‘‘अरे!…मैं बना देती।आपने क्यों तकलीफ की।“वह चाय का कप हाथ में लेते हुए बोली।

बमुश्किल इक्कीस-बाईस की उम्र होगी उसकी। अभी-अभी बी.एस-सी. पास करके एम.एस-सी. में दाखिला लिया हैं। पढ़ाई के नाम पर पूछने के लिए आती रहती है। पर मैं उसकी आँखों में एक चमक महसूस करता हूँ, जब तक वो यहाँ रहती है।

‘‘जानते हैं आप…“ चाय पीते हुए वह बोली।

‘‘क्या?“

‘‘जीवन में मैं भी कुछ बनना चाहती हूँ…कुछ करना चाहती हूँ।“

‘‘बिलकुल… बनना है…कुछ करना है।“

वह चुप रही, पर थोड़ी देर बाद बोली, उसकी आँखों में वही चमक थी ‘‘आप साथ दोगे, तब।“

उसकी बात सुनकर मैं मुस्कराया, ‘‘दे तो रहा हूँ। रोज तुम्हें नोट्स लाकर देता हूँ।“

मैं जानता हूँ कि इन्हीं नोट्स को लेने वह रोज आती है… घंटों बैठी रहती है… वो अपना काम करती है और मैं अपना… काम करते-करते वह तिरछी निगाहों से मुझे देख लेती है…

‘‘एम.एस-सी. अच्छे नम्बरों से पास करो, फिर सिविल सर्विसेज की तैयारी करो… निकल जाओगी।“मैंने कहा। चाय का आखिरी घूँट भरा और चाय का कप टेबिल पर रख दिया।

‘‘आप साथ दोगे तब न!“कहती हुई वह खिलखिलाकर हँस पड़ी।

‘‘दे तो रहा हूँ।“ उसकी हँसी में मैं भी शामिल हो गया।

बाहर चाँदनी बिखर गई।

‘‘आपके सिर के बाल सफेद होने लगे हैं!“उसकी आँखों में फिर वही चमक उभर आई।

‘‘चालीस की उम्र भी तो हो गई है। बाल तो सफेद होंगे ही।“ कहता हुआ मैं हँसा।

‘‘… पर अच्छे लगते हैं!“उसके होंठ फड़फड़ाए।

वह कुछ और कहना चाह रही थी, पर कह न पाई… नोट्स उठाये और चली गई।

मैं बैठा रहा… उसकी चमक को अपने भीतर महसूस करने लगा… वर्षों पूर्व एक धुँधली-धुँधली तस्वीर मेरी आँखों में तैरने लगी…

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