जून 2026

देशपछतावा     Posted: December 1, 2025

मोहन ने अभी-अभी अपने पैंट के बटुए में मोबाइल रिचार्ज के लिए पाँच सौ रुपये रखे ही थे।

पास ही उसकी पत्नी चंपा देवी रसोई में थीं।

घर में राशन लगभग खत्म था, और बेटी के जूते भी फट चुके थे।

उन्होंने झिझकते हुए धीरे से बटुए से तीन सौ रुपये निकाल लिये और झोला लेकर राशन लेने बगल की दुकान चली गईं।

कुछ देर बाद जब मोहन ने पैंट पहनी और बटुआ टटोला, तो पैसे कम थे। माथे पर लकीरें तन गईं।

उन्हें बेटे लालू पर शक हुआ और गुस्से में उसे पकड़कर पीटने लगे।

लालू रोते हुए चिल्लाया—“बाबा! मैंने आपका पैसा नहीं लिया… सच में नहीं लिया!”

पर मोहन का गुस्सा और भड़क उठा—“झूठ मत बोल! तू ही लिया है… और कौन लेगा मेरा पैसा?”

इतने में पास खड़ी बेटी आशा रो पड़ी—“बाबा! भैया को मत मारिए… पैसा तो मम्मी ने निकाला था!”

तभी चंपा देवी राशन का झोला लिए घर लौटीं।

मोहन ने पत्नी की ओर देखा, फिर बेटे के आँसुओं की ओर। सन्नाटा छा गया।

लालू सुबकते हुए बोला—“मम्मी… आप चोर हैं क्या?”

चंपा देवी की आँखें भर आईं। उन्होंने झोला धीरे से ज़मीन पर रखा, बेटे के सिर पर हाथ फेरा और बिना कुछ बोले आँगन से बाहर चली गईं।

मोहन वहीं खड़ा रह गया— अंदर किसी चीज़ के टूटने की आवाज़ सुनाई दे रही थी…

शायद भरोसे की।

-0-तेज नारायण राज जामा, दुमका, (झारखंड) संपर्क सूत्र-6207586995

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