उनकी बीस बरस से कुछ ज्यादा पुरानी पत्नी कुछ ज्यादा ही सजी धजी रहने लगीं थीं। भोजन में भी कुछ परिवर्तन दिखा। फोटो भी आजकल कुछ ज्यादा खिंच रहे हैं। दिवाली पर घर की सफाई आम बात है पर इस बार ज़रा ज्यादा ही सँवारा गया। आवश्यकता से अधिक किफायती पत्नी ने डिज़ाइनर दिए खरीदे, रंगोली भी बड़े लगन से बनाई और तरह तरह के पकवान भी बनाए। हर मुद्दे पर आवश्यकता से अधिक उत्सुकताजैसे जीवन के दिन सीमित हों और पत्नी जी उन्हें जी भर जीना चाहती हो। हद हो गई जब बाल दिवस पर बच्चों को खुश करने के विशेष प्रयास किये। स्वयं केक बनाया, उपहार लाई और फिल्म दिखाने ले गई!!! पति महोदय बहुतअचम्भे में थे ,पर माजरा समझ नहीं आ रहा था ।
कंप्यूटर से ज़रा कम वास्ता रखने वाले पति महोदय ने एक दिन पुरानी फोटो देखने के लिए जब कंप्यूटर का पिक्चर्स फोल्डर खोला तो दंग रह गए! नए नए अंदाज़ में पत्नी के फोटो, गाड़ी के स्टेरिंग पर (वह गाड़ी चलाना भी नहीं जानती), सहेलियों के साथ, बगीचे में, रसोई में, दिवाली के दीयों की थाली पकड़े हुए, जुल्फें लहराते हुए! पति महोदय को काटो तो खून नहीं!अनहोनी की आशंका से घबरा उठे, कहीं …
नहीं नहीं!, खुद को ही झिड़क दिया उन्होंने, इतनी समर्पित पत्नी के बारे में ऐसे विचार… और अब तो कईं हफ़्तों से बेचारी ने शिकायत करना भी बंद कर दिया है, तो फिर यह सब क्या है????
आखिर सब्र चुकने लगा तो कुछ रोज़ बाद बेटे को पार्क ले गए, आइसक्रीम दिलाई बड़े हलके से पूछा -बेटे आजकल तुम्हारी माँ में कुछ परिवर्तन अनुभव कर रहा हूँ, क्या… बात पूरी करने से पहले ही बेटा गर्व से बोला – ” पापा माँ अब फेसबुक पर है!!!
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लघुकथा.com
जून 2026
देशपरिवर्तन Posted: December 1, 2015
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