पाखी को उसके घर जाकर फिज़िक्स की ट्यूशन पढ़ाते मुझे एक साल और पाँच महीने हो गए थे। पंद्रह-सोलह वर्षीय खूबसूरत,मासूम-सी पाखी बहुत ही मेधावी थी। उसके पापा बचपन में
ही एक हादसे में गुजर गए थे। तब से उसकी मम्मी का तो जैसे एक ही लक्ष्य था-अपनी बेटी को पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाना। पाखी की माँ दूसरों से अलग थी,एक तो मेरा बहुत सम्मान करती थीं,दूसरे ट्यूशन के समय बेमतलब आस-पास मँडराती नहीं थीं।
पिछले कुछ दिनों से मैं पाखी में कुछ बदलाव महसूस कर रहा था,जब मेरा ध्यान किताब में होता, तो वह अपलक मेरी ओर देखने लगती।
“सर, आपकी शादी हो गई?”एक दिन अचानक उसने पूछ लिया ।
“क्यों?” मुझे हैरानी हुई,वह ट्यूशन के दौरान पर्सनल बातें नहीं किया करती थी।
“वैसे ही …जानना है.. “- उसने भोलेपन से जवाब दिया।
“नहीं ,”मैंने बताया,”मेरी दो छोटी बहनें हैं,उनकी शादी हो जाएगी ,तब मेरी होगी।”
“सर! आप मुझे बहुत अच्छे लगते हैं।” उसने शरारत से मुस्कराते हुए कई बार पलकें झपकाईं।
मुझसे उम्र में आधी पाखी की इस हरकत से मेरे होश उड़ गए,मुझे उससे ऐसी उम्मीद नहीं थी,ट्यूशन सर्किल में दूसरे कई ट्यूटर्स के किस्से याद आ गए,जो वे चटखारे ले लेकर एक दूसरे से शेयर किया करते थे।
“पाखी! पढाई में कंसन्ट्रेट करो” मैंने उसकी बात को नज़रअंदाज़ करते हुए कहा था।
घर लौटने पर भी पाखी का ‘आप मुझे बहुत अच्छे लगते हैं’ दिमाग से निकल ही नहीं रहा था। बहुत देर तक नींद नहीं आई,तो नेट पर ‘टीनेज लव’ के बारे में सर्च करने लगा, फ़िल्मी दुनिया और दूसरे सैकड़ों उदाहरण पलक झपकते ही सामने आ गए ,जहाँ टीनेजर्स लड़कियाँ अपनी उम्र से दुगनी उम्र के पुरुषों से प्यार करती थीं।बेरोजगारी के बुरे दौर से गुजरते हुए पहली बार मैं खुद को किसी फिल्मी हीरो जैसा महसूस कर रहा था।
मैं ट्यूशन देने पहुँचा,तो वह मुझे बहुत गंभीर लगी,उसने बताया की ममा बाजार गईं हैं,उसे आज मुझसे अपने मन की बात करनी है,जो ममा के सामने नहीं कर पाएगी।
इस स्थिति की मैंने कल्पना भी नहीं की थी। मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा।अभी मैं सोच-विचार में पड़ा ही था कि उसने मेरा दाहिना हाथ पकड़ लिया और मुझे अपने कमरे की ओर खींचकर ले जाने लगी।
अगले ही क्षण हम आदमकद आईने के सामने थे,वह आगे थी,उसके पीछे मैं था,मेरा दाहिना हाथ अभी भी उसके हाथ में था।अब वह एकटक मेरी आँखों में झाँक रही थी। मेरे देखते ही देखते उसकी ऑंखें डब डब करने लगीं,वह रुँधी हुई आवाज़ में बोली,”सर,आइ लव यू !!”
उसके हाथ में मेरा हाथ थरथरा गया।
उसकी बात अभी पूरी नहीं हुई थी, बोली, “इस जन्म में मुझे डैडी का प्यार नहीं मिल॥ मैं चाहती हूँ अगले जन्म में मुझे आप जैसे डैड मिलें!!”डब-डब करती आँखों से आँसू बह निकले।
कहकर वह आईने के फ्रेम से बाहर हो गई।
कमरे में मैं अकेला खड़ा था, पर अब आईना मुझे देखे जा रहा था।
-0- [लघुकथा कलश जनवरी-जून 2022 से साभार]