लड़की दसवीं कक्षा में थी और लड़का बारहवीं कक्षा में! दोनों एक ही स्कूटी से स्कूल आते, एक ही स्कूटी से वापिस जाते। लंच समय में भी दोनों अक्सर साथ होते, स्कूल में प्रायः उन्हें साथ ही देखा जाता! स्कूल में आए नए प्राचार्य ने एक दिन लड़का-लड़की को बुलाया और कहा, ‘‘बेटा, थोड़ा तहजीब सीखो! इस तरह से स्कूल का माहौल खराब होता है! तुम दोनों को बाक़ी बच्चे देखेंगे तो क्या सीखेंगे?’’
‘‘व्हाट सर! हमने क्या किया है?’’ लड़की ने प्रतिप्रश्न किया।
‘‘बेटा लड़का-लड़की साथ-साथ रहेंगे घूमेंगे तो…”
“लेकिन सर इसमें बुरा क्या है?”
“तुम मुझे सिखा रहे हो? समझा रहे हो या बता रहे हो? आजकल का माहौल है यह, ठीक है; लेकिन यह स्कूल में नहीं चलेगा बेटा!”
ये मेरे बड़े भैया हैं सर, हम तो घर से साथ आते हैं, साथ ही जाते हैं! टिफिन अदल-बदल लेते हैं कई बार, भैया मेरी केयर करते हें!’’
‘‘तुम रियल बहन भाई हो?’’
‘‘हाँ सर।’’
‘‘लेकिन रहते तो तुम दोस्तों की तरह हो।’’
‘‘तो सर हमें कैसे रहना चाहिए!’’ -लड़की ने प्राचार्य की आँख में आँख डालकर सवाल किया!
प्राचार्य निरुत्तर लड़की को देखते रहे!
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