वे महीने में तीन-चार बार परिवार सहित शहर के एक होटल में खाना खाने जाया करते थे। वेटर को टिप में कभी सौ रुपए,तो कभी और ज्यादा देते थे। एक बार पत्नी ने वेटर के जाते ही उनसे पूछा-‘‘आप वेटर को पाँच-दस रुपए टिप देने के बजाय, सौ या सौ से ज्यादा रुपए क्यों देते है?’’
‘‘इन बेचारों को तनख्वाह बहुत कम मिलती है।’’ उन्होंने जवाब दिया।
‘‘आपको कैसे पता कि इनको तनख्वाह कम मिलती है?’’
‘‘क्योंकि बेराजगारी के दिनों में मैंने भी कुछ महीने वेटर का काम किया था।’’