कैबिन से निकलते हुए अभिनीत ने पूछा, “क्या आज घर नहीं जाना मिस प्रियंका?”
थकी उलझी सी आवाज़ में प्रियंका बोली, “अरे जाना क्यों नहीं, बस इस फ़ाइल ने उलझा रखा है। कल सुबह मीटिंग है और यहाँ आँकड़े ही -नहीं मिल रहे।”
अभिनीत उसकी सीट के पास आकर थोड़ा- सा झुकते हुए बोला, “लाओ मुझे दिखाओ, अगर मैं कुछ कर पाऊँ।”
फ़ाइल उसकी ओर बढ़ाते हुए प्रियंका बोली, “लो तुम भी कोशिश करके देख लो।”
कुछ ही मिनटों में उसने गलती पकड़ ली और फ़ाइल प्रियंका को देते हुए बोला, “लो, हो गई तुम्हारी समस्या हल।”
खुश होते हुए प्रियंका ने धन्यवाद किया और आँकड़ों को सही से लिखने लगी।
अभिनीत उसकी कुर्सी की बैक पकड़कर वहीं खड़ा हो गया। प्रियंका ने उसे जाने के लिए कहा भी; लेकिन फिर भी वह खड़ा रहा। बेख़बर प्रियंका काम पूरा करने में व्यस्त थी। तभी उसके कंधे को छूकर अभिनीत बोला, “टाइम तो देखो, ऑफ़िस खाली हो गया है। चलो, आज मैं तुम्हें घर छोड़ देता हूँ। यह काम तो सुबह भी हो सकता है।”
काम में लगी प्रियंका ने बिना कुछ बोले अपना कंधा उचकाकर उसका हाथ झटक दिया। चंद पलों के बाद ही उसे अपने कंधे पर उँगली की सरसराहट महसूस हुई।
उसने तुरंत फ़ाइल बंद की, अपना बैग उठाया और आग्नेय नेत्रों से उसको घूरते हुए ऑफ़िस से बाहर निकल गई।
अभिनीत फिर बोला, “रुको प्रियंका, मैं तुम्हें छोड़ देता हूँ।”
प्रियंका ने उसे अनसुना करके ऑटोरिक्शा ले लिया।
घर पहुँचकर दरवाज़े की घंटी पर उँगली रखी और बौखलाहट में लगातार बजाती चली गई।
भीतर से माँ की आवाज़ आई, “कौन है भाई ज़रा सब्र करो, आ रही हूँ। लगता है घंटी पर से हाथ हटाना ही भूल गए हो।”
दरवाज़ा खुलते ही प्रियंका को जल्दी से अंदर आते देखकर माँ ने पूछा, “क्या हुआ बेटा, इतने तनाव हुई क्यों हो?”
प्रियंका बिना कुछ बोले अंदर आई, आँगन में पड़ी खाट पर बैग एक ओर पटका और अपने दोनों हाथों में सिर देकर बैठ गई।
माँ ने फिर पूछा, “हुआ क्या है जो इतनी परेशान है। कुछ बता तो सही।”
माँ के बार-बार पूछने पर प्रियंका ने ऑफ़िस में घटी घटना बता दी।
आधी बात सुनते ही माँ ने झट से उसके मुँह पर हाथ रखते हुए कहा, “बस चुप, मैं तेरी सारी बात समझ गई हूँ। ख़बरदार जो यह बात किसी और को बताई। किसी को भनक भी पड़ गई तो तू बेवजह बदनाम हो जाएगी।”
अभी माँ हिदायतें दे ही रही थी कि पता नहीं कहाँ से एक बिल्ली आँगन में आ गई।
बरामदे में खेल रहा बबलू बिल्ली को देखकर खुश होता हुआ भागा-भागा वहाँ आया और बिल्ली को छूने के लिए जैसे ही आगे बढ़ा बिल्ली ने म्याऊँ-म्याऊँ का शोर मचा दिया और बबलू पर झपटने के लिए पंजे उठा लिये। बिल्ली को खूंखार होता देखकर बबलू वहाँ से भाग खड़ा हुआ।
परेशान बैठी प्रियंका बिल्ली को यूँ झपटता देखकर झट से बोली, “देखा माँ बिल्ली को! गलत का प्रतिरोध ज़रूरी है।
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