गढ़वाली अनुवादः डॉ. कविता भट्ट
घटनास्थल परै रिपोर्टर जिला कलेक्टर तैं सवाल पुछदु “दिन दोफरी बीच बाजार म एक ज्वान नौना न पेट्रोल डाळिक अफु परैं आग लगै दिनी। आग लगाण सि पैली वे न एक घंटा तलक सरकार
अर कानून व्यवस्था का प्रति काफी गुस्स्सा जतायी छौ। इतगा वक्त काफी छौ वे तैं जान देण सि रोकण वास्ता। कतगा बेकार व्यवस्था च आपै की। एक ज्वान नौना तैं बचै नि साकी। आखिर
जिलै की कानून व्यवस्था अर शान्ति बणै रखण की जिम्मेदारी आपै की च।” रिपोर्टर न जिला कलेक्टर पर सवालु अर आरोपु की बौछार कर दे।
“मि उबारी मीटिंग म छौ। याँकी सूचना मि तैं बाद म मिली। मिन जाँचा आदेश दियली कि यु सब, कबारी अर कन करी क ह्वै? याँ का पिछनै कै हौर उछियादी कु हाथ त नि छौ? वे नौना न आग
अफी लगायी कि कै हौर न लगायी।” कलेक्टर न जवाब दिनी।
“वु नौनु अफी पेट्रोल अर माचिस लीक ऐ छौ। सरकारा बारा म गुस्सा दिखौणा बाद वे न अफु पर पेट्रोल डालिक आग लगै दे। मि मु याँ कु वीडियो च। मि आप तै वे वीडियो दिखै सकदू।”
रिपोर्टर न छाती फुलै क बोली।
“यु वीडियो आप तै कख बिटी मिली?” कलेक्टर न पूछी।
“यु वीडियो मिन अफी रिकार्ड करी।” रिपोर्टर न अफु पऱ गर्व
करिक बोली।
“त याँ कु मतलब आप यीं घटना का सैंदिक दिखदारा छाँ।”
“जी हाँ, बिल्कुल। मि आप तैं शुरू बिटी खतम हूण तक एक-ंएक बात फैलास करिक बतै सकदौं। मेरा तरौं सौवों की भीड़ भी वुखिम मुँ छै। मेरा वीडियो की सच्चाई तैं आप प्रमाणित करै
सकदन।” रिपोर्टर न बिश्वासै दगड़ी जवाब दे।
‘‘वे बगत आप सब्यों की मनख्वात कख छै?” कलेक्टर साहब न कुछ ब्यंक करिक पूछी।
“जी, क्य मतलब?”
“मतलब यु कि अगर वे नौना की जगा आपौ कु भाई या नौनु होंदु त तब तब बि क्या तुम बौगा मारिक वीडियो रिकॉर्ड कन्ना रैंदा?” फिर भीड़ै तर्फां देखिक बोली, “सपष्ट सी बात च कि
वु आप मनै कै कु बि सगा-ंउचयसम्बन्धी नि छौ।”
“यीं घटना कु मितैं तगड़ू दुःख च पर यीं इस घटना का बारा माँ, जाँ का आप सैंदिक दिखदारा रयाँ, मि सि सवाल कन्न से पैली एक बगत अफु सि बि सवाल कैर ल्यावा। क्य आपै की क्वी जुम्मेबारी
नि छै?”
कड़ा सब्दु माँ कलेक्टर साबा पुछ्याँ सवाल सुणिक अब चारों तरफ सन्न ह्वै गे छौ। रिपोर्टर पर भी हणाँक न कणाँक।
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