सुबह से वे कितनी बार फोन लगा चुके थे, पर फिर भी पोते से बात नहीं हो पा रही थी। अब तो धीरे-धीरे उनकी प्रसन्नता, उदासी में बदलने लगी थी। कितने उत्साह से सुबह पोते से बात करने फोन हाथ में लिया ही था कि ___
“अरे! बावले हो गए हो क्या? जो इतनी सुबह- सुबह फोन लगाने बैठ गए।वो आपका गाँव नहीं, शहर है, वहाँ सभी लोग अभी सो रहे होंगे, परेशान हो जाएंगे, बाद में बात करना।”- पत्नी की बात सुनकर वे मन मसोसकर रह गए और फोन रख दिया।
थोडी देर बाद फिर दोबारा फोन लगाया तो बहू ने बताया कि “राहुल तो स्कूल चला गया जब आएगा तो बात करा दूंगी।”
पर इंतजार करते-करते शाम के चार बज गए, फोन नहीं आया तो उन्होंने फिर फोन किया तो बहू ने बताया कि “राहुल कोचिंग पढ़ने चला गया है, वहाँ से आएगा तब ही बात हो पाएगी।”
“अब तो रात के आठ बज गए, पोता घर आ चुका होगा।” -सोच कर उन्होंने फिर फोन लगाया पर इस बार बहू ने कहा “बाबूजी वह स्पोर्ट्स क्लब से अभी तक नहीं आया है।पिछले महीने टेबिल टेनिस के स्टेट लेवल सिलेक्शन में एक स्टेप रह गया था। तो इस बार हम कोई गलती नहीं करना चाहते आप परेशान न हों , आएगा तो मैं आपसे जरूर बात करा दूंगी।”
” अच्छा बहू! “- कहकर उन्होंने उदास होकर फोन रख दिया।
इंतजार करते- करते रात के बारह बज गए पर फोन न आया। एक आखरी बार, बात करने की गरज से उन्होंने हिचकते हुए फिर फोन लगा ही लिया, इस बार फोन बेटे ने उठाया
” क्या बात है? बाबूजी, इतनी रात गए फोन किया ?”
” राहुल से बात करनी थी।”
” पर वह तो सो गया है।”
” अच्छा!. …बेटा अगर न सोया हो तो थोड़ा मेरी बात करा दे”
” बाबूजी उसके शेड्यूल के हिसाब से वह सो गया है।”
” बेटा …आज उसका जन्मदिन है, तो. .”
” हाँ बाबूजी जन्मदिन था, सुबह स्कूल चॉकलेट्स और गिफ्ट्स लेकर गया था, बच्चों के साथ मनाया होगा, आप कल बात कर लेना।”- सपाट शब्दों में बोलकर बेटे ने फोन रख दिया।
” दादाजी…. प्रॉमिस कीजिए मेरे बर्थडे पर सबसे पहले आप ही मुझे विश करेंगे।” – छुट्टियों में गाँव आए, पोते की बात याद कर उनका दिल जार जार रो उठा।
-0-अर्चना राय, भेडाघाट, जबलपुर (म.प्र.)