बच्चे गुड्डे गुड़िया खेल रहे थे । गुड़िया का नाम स्वीटी, गुड्डे का नाम बन्टी हैं ।गुड़िया रिनी की और गुड्डा राघव का है ।आज स्वीटी रूपक का विवाह है।
स्वीटी बहुत सुंदर है, बहुत प्यारे कीमती कपड़ों और ढेर सारे गहनों से लदी है ।अपनी गुड़िया पर उसे गर्व है, वह उसे टिन्नी की सूखी गुड़िया से दूर रखती है और उसका मजाक बनाती रहती है कि पढ़ पढ़ कर सूख रही है, बिल्कुल भी सुंदर नही है, कोई ब्याह भी नही करेगा ।आज वह सूखी गुड़िया भी विवाह समारोह में आई है।
सारे रीति रिवाज के साथ विवाह संपन्न हुआ, अब विदाई की बारी थी, स्वीटी सबसे मिल रही थी, देर होने लगी तो गुड्डे की ओर से राघव जल्दी करने लगा।
रिंकी भी गुड़िया की ओर से इतरा कर बोली,”इतनी सुंदर और सम्पन्न है स्वीटी, ढेर सारा दहेज दे रही हूँ।वह जब चाहेगी चलेगी ।”
राघव को गुस्सा आया बड़बड़ाया,”घमंडी,नकचढ़ी, अनपढ़,नही चाहिए ऐसी सुंदरता ।सीख उससे जिसे तू सूखी कहती है कितना पढ़ी लिखी है, समझदार है। अच्छा होता बंटी का विवाह उससे कर देता। बोल टिन्नी करेगी विवाह?”
टिन्नी उठी बोली,”चल सूखी ,तेरी पढ़ाई अभी बाकी है, तू कलेक्टर बनेगी। टी वी पर सुना है बेटी पढ़ाओ ।“