कश्मीर सिंह अपने बेटे का मैडिकल करवाने सिवल सर्जन के दफ्तर आ पहुँचा था। घर से चलने से पहले, उसने दोस्त सुरजन सिंह को भी संदेशा भेज दिया था और वह भी मिल गया था।
कश्मीर सिंह ने अपने एस.डी.ओ. सिलैक्ट हुए बेटे दिलदार को मैडिकल बोर्ड की तरफ भेज, सुरजन सिंह के साथ चाय पीने चला गया।
‘‘तेरी तो जिंदगी सुधर गई कश्मीरे भाई।’’ सुरजन ने कहा।
‘‘हाँ, वाहगुरू की मेहर हो गई, सच्चे पातशाह की!’’
‘‘बहुत मुश्किल है आजकल के जमाने में क्लास-वन गज़टेड पोस्ट मिलनी।’’
‘‘मैं तो कई बार सोचता हूँ, सुरजन मियाँ, पता नहीं वाहगुरू का देना कैसे मोड़ेंगे। आज, घोर कलयुग के जमाने में, बिना पैसा-धेला खर्च किए, आसमान पर पहुँचा दिया।’’ कश्मीर सिंह जैसे रब्ब की मेहर के आगे झुका जा रहा था।
‘‘वाहगुरू का शुक्र है ही, पर लड़का भी तो लायक है अपना।’’
‘‘इस में कोई झूठ नहीं, कालेज का बैस्ट एथलीट और बैस्ट ग्रेजुएट।’’ बात बताते कश्मीर सिंह का रंग लाल सुर्ख हो गया था।
इसी तरह बातें करते-हँसते मुस्कराते, वह वापिस मैडिकल बोर्ड के कमरे के सामने आ खड़े हुए। कश्मीर सिंह कह रहा था, ‘‘भई! मैं तो अरदास करता हूँ कि वाहगुरू सभी के घर बढ़िया पौधे ही लगाए।’’
कश्मीर सिंह का हँसता चेहरा तब पीला पड़ गया, जब दिलदार ने डॉक्टर की रिपोर्ट बताई कि ब्लड प्रैशर ज्यादा है। कश्मीर सिंह को एकदम गुस्सा आ गया, ‘‘ब्लड प्रैशर ज्यादा है! बैस्ट एथलीट और कह दिया कि ब्लड प्रैशर ज्यादा है।’’
वह सिविल सर्जन के स्टैनो के पास गया ,जो कि उसके गाँव का था। ‘‘कोई न भाई साब। घबराने की कोई बात नहीं। यह कोई बड़ा नुक्स नहीं है। मैं करता हूँ बात। लालची है जरा-सा, डॉक्टर और कुछ नहीं।’’
स्टैनो डॉक्टर से मिलने चला गया। सुरजन ने आकर पूछा, ‘‘क्या कहता है।’’
‘‘कहता है लालची है डॉक्टर, ब्लड प्रैशर बढ़ा दिया साले ने…..’’
‘‘चल छोड़। ये इस तरह ही करते हैं। पाँच-सौ रुपए माँगता होगा और क्या! मार मुँह पर।’’
‘‘पाँच-चार सौ की बात नहीं सुरजन मियाँ। बात यह है कि इसने दिलदार के दिल में बीज गलत बीज दिया है और कुछ नहीं।’’
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