एक संभ्रांत बारात सड़क पर जा रही थी। चौंधियाती लाइटों व बैंड की कानफोड़ू आवाजों के बीच बाराती अपनी मस्ती में डांस कर रहे थे, जिसके कारण बारात धीरे-धीरे रेंग रही थी। चमकती-दमकती भारी भरकम लाइटों को कंधे में उठाए, कम उम्र के लड़कों को बार-बार अपना कंधा बदलना पड़ता था। लाइट पकड़े लड़के के साथ में एक दूसरा लड़का रहता था, जो कुछ समय बाद अपने साथी को आराम देकर लाइट अपने कंधे में उठा लेता था। तभी किसी बाराती नें नाचते हुए साथियों पर न्योछावर करके कुछ रुपये हवा में उछाल दिए। गिरे हुए रुपयों को उठाने के लिए एक लड़का नीचे झुका और नाचते हुए बरातियों से टकरा गया। इस पर गुस्साए हुए बारातियों ने उसे लात घूँसों से बुरी तरह मारा। किसी की मजाल नहीं थी कि उन टाई सूट में सजे बेरहम बारातियों से उस पंद्रह सोलह साल के दुबले पतले लड़के को छुड़ा पाता। आखिर थक- हारकर उन बरातियों ने लड़के को छोड़ दिया और फिर डांस में मशगूल हो गए।
राहगीरों में से कुछ लोगों ने लड़के पर दयापूर्ण दृष्टि फेंकी और उसे जमीन से उठा लिया; लेकिन आश्चर्य ! लड़का रोने की जगह हँस रहा था। उसने दायें हाथ की मुट्ठी में एक दस रुपये का नोट दबा रखा था। उसने चमकती आँखों से वह नोट अपने साथी को दिखाया। जो लाइट पकड़े हुए अपने साथी लड़के के हाथ में दबे नोट को लालचपूर्ण निगाहों से देख रहा था और अपने भाग्य को कोस रहा था।
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