‘कितने दिन से कह रही हॅूं मुझे ये फर वाला कोट दिला दो, हाय मम्मा यह कितना प्यारा है’- शिन्नी ने शो केस में लगे कोट को देखकर कहा।
‘चल अभी तो देख कितना समान खरीदना है, तो किराने का सामान लेना है फिर लेंगे ’ मम्मी ने कोट का टैग देखा और लगभग उसे खींचती बोली।
‘रहने दो मम्मी मेरे लिये तो कभी आपके पास पैसे रहते ही नहीं, अभी भैया ने कुछ कहा होता तो आपके पास हाल पैसे निकल आते ’ कहकर शिन्नी ने गुस्से से मुँह घुमा लिया ।
‘भैया के लिए तो बेटा ऐसा कुछ लेती ही नहीं। लड़कों के लिए खरीदारी करने को कुछ होता ही नहीं। वही टी -शर्ट, पैण्ट बहुत करो तो चश्मा और पैन। तेरे तो क्लचर्स ही कितने महँगे आ गए। कहने को तीन क्लचर्स हैं बस ।
‘ठीक है महँगे हैं ,तो चलो वापस कर आऊॅं ’ वह मॉं को खींचती बोली ।
सड़क पर तमाशा मत कर चल घर, कुछ नहीं लेना मुझे ’ मॉं ने रिक्शा रोक लिया।
‘अब सामान तो ले लो’-शिन्नी बोली।
‘रहने दे बेकार फिर आऊँगी ’ शिन्नी ऑंखों में आँसू भरे रिक्शे पर बैठ गई । मॉं बेटी का मूड खराब रहा, ऐसे ही दो साल और निकल गए ।
शिन्नी का विवाह हो गया । शिन्नी पहली विदा पर आई तब भी सर्दी शुरू हो गईं थी। विदा के लिए सामान खरीदना था।
‘ शिन्नी चल अपनी पसंद का ही कुछ ले ले।’ -मॉं ने कहा।
उसी शो रूम पर इस बार मॉं ठिठक गई ,‘शिन्नी फर का कोट ले ले ,अच्छा रहेगा सूट तो कई हो गए हैं ’
‘ नहीं मॉं इतने पैसों में तो चार सूट आ जाएँगे, दिखेंगे तो कि चार सूट लाई, पर मॉं दो ही रखना, अभी तो शादी में इतने रुपये खर्च हो गए , अब फिर ले लेंगे पहले जरूरी सामान ले लों।’ ।
आज मम्मी की ऑंख में आँसू भरे थे । सहसा मेरी बेटी कितनी बड़ी हो गई ।
-0- डॉ.शशि गोयल ,सप्तऋषि अपार्टमेंट,जी -9 ब्लॉक -3 सैक्टर 16 बी आवास विकास योजना, सिकन्दरा आगरा 282010मो 09319943446