जून 2026

संचयनमहँगाई     Posted: April 1, 2015

बीयर–बार के एक कैबिन की चर्चा–
पहला–‘‘यार महँगाई इतनी बढ़ गई है कि घर चलाना मुश्किल हो गया है आजकल। मैंने आज वाइफ को बोल दिया है कि दूध आधा कर दो।’’
दूसरा–‘‘तू ठीक…..कह रहा है…यार! मैंने मिट्टी–तेल में कटौती कर दी है, फिर भी….हमारे यहाँ..किरानेवाले काबिल पहले से भी ज्यादा आ रहा है। मैं तो….परेशान हूँ…इस महँगाई से।’’
तीसरा–‘‘ महँगाई ने तो सच में नाक में दम कर दिया है यार! आज ही बीवी ने बच्चों के लिए कपड़े लाने को कहा तो मैंने डपट दिया कि अभी जो हैं उन्हीं से काम चलाओ।’’
चौथा–‘‘पहले ही वेतन में पूरा नहीं पड़ता। ऊपर से बीवी तो सामान की रोज ऐसे लिस्ट पकड़ा देती है ,जैसे रुपए झाड़ पर लग रहा हो। इन औरतों केा तो भगवान् जाने कब अक्ल आएगी!’’
बेयरा–‘‘साहब बिल।’’
पहला–‘‘कितने…का…है–रे।’’
बेयरा–‘‘पाँच सौ रुपए का साहब।’’
दूसरा–‘‘इधर ला, पेमेण्ट मैं करूँगा।’’
तीसरा–‘‘तू कैसे देगा।’’
चौथा–‘‘तूने तो कल ही दिए थे। आज मैं दूँगा।’’
चारों की आवाज ‘‘मैं दूँगा,मैं दूँगा।’’ से बीयर–बार गूँजने लगा।
-0-

गतिविधियाँ

  • सम्पर्क:-

    सुकेश साहनी

    185,उत्सव,महानगर पार्ट–2
    बरेली–243122 (उ.प्र.)


    sahnisukesh@gmail.com

    रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´

    रचनाएँ भेजने के लिए ई-मेल-:-

    laghukatha89@gmail.com

    विशेष सूचना-:-

    पूर्व अनुमति के बिना लघुकथा डॉट कॉंम की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता ।

    केवल स्वीकृत रचनाओं की ही सूचना दी जाती है।

    -सम्पादक द्वय

Design by TemplateWorld and brought to you by SmashingMagazine