जून 2026

देशमुस्कराहट     Posted: March 1, 2018

फीडबैक सत्र शुरू हो गया था।

इस प्रसिद्ध होटल का यह कायदा था कि हर सप्ताह ग्राहकों द्वारा दिए गए फीडबैक पर चर्चा की जाती थी। ऑनलाइन फीडबैक के प्रचलन से यह सत्र कर्मचारियों के लिए मुश्किल भरे होते जा रहे थे। सामने प्रशंसा करता ग्राहक न जाने ऑनलाइन क्या शिकायत कर जाता था, जिसका खमियाजा सबको भुगतना पड़ता था।

पिछले सप्ताह रिसेप्शन ड्यूटी पर कौन-कौन था? मैनेजर ने कड़कते हुए पूछा था।

नताशा और मीनल ने हाथ उठाए थे।

मिस मीनल और मिस नताशा, आपके बारे में पाँच कस्टमर के कॉमेंट्स हैं कि आपके रिसेप्शन पर बैठे कर्मचारी रोनी सूरत बनाए हुए रहते हैं, जिन्हें देखकर होटल में रुकने का मन ही नहीं करता।

नताशा और मीनल ने सिर झुका लिया था…

अरे, आपका काम ही कस्टमर को खुश रखना है, क्या जाता है जरा- सा मुस्कुराने में? मुस्कुराकर दिखाइए…

दोनों हड़बड़ा गईं थीं…

अरे, मुस्कुराइए, करना क्या है, ज़रा से ओंठ ही तो फ़ैलाने होते हैं, उसमें इतनी तकलीफ?

नताशा की स्मृति में दो माह से बीमार पड़ा उसका बच्चा कौंध गया, जिसे ताले में बंद करके काम पर आना उसकी मजबूरी थी…

मीनल के शरीर और मन पर लगे सारे घाव टीसने लगे ,जो उसके पति ने नशे में धुत् हो उसे दिए थे…

दिल रो रहे थे दोनों के ,फिर भी दोनों ने मुस्कुराने का असफल प्रयास किया…

मैनेजर कहता जा रहा था, गुड ! मुस्कुराइए, करना क्या है, ज़रा से ओंठ ही तो फ़ैलाने होते हैं, उसमें इतनी तकलीफ?

भारती पंडित- भारती पंडित , A-24, Vineet Kunj ,Akbarpur, Kolar Road,Bhopal

 

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