‘मेरी पसंद’, “लघुकथा डॉट कॉम” का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है जो लेखक और पाठक की दूरियों को कम करता हुआ लघुकथाओं के रचनात्मक विश्लेषण को निष्पक्ष रूप से मुखरित करता है । यहाँ न केवल एक लघुकथाकार बल्कि एक सामान्य पाठक भी खुल कर अपने विचार अपनी पसंद में समाहित करता है और यही ख़ूबसूरती है इस स्तंभ की । लघुकथाओं के अभिभावक एवं दिग्गज लघुकथाकार आ. सुकेश साहनी सर एवं आ. रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ सर के संपादन एवं अयन प्रकाशन द्वारा प्रकाशित “मेरी पसंद” का पाँचवाँ खंड हमारे सम्मुख है । लघुकथा-विमर्श की इस महत्वपूर्ण पुस्तक में मेरी पसंद को भी शामिल किया गया है । यह मेरे लिये बहुत प्रसन्नता का विषय है , जिसमें मैंने महेश शर्मा जी की पुरस्कृत लघुकथा “ज़रूरत” और सुभाष नीरव सर की प्रसिद्ध लघुकथा “दो हज़ार का नोट” पर अपने विचार रखे हैं । यक़ीन मानिए यहाँ लघुकथाएँ की ख़ूबसूरती इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि न केवल अपने मूल रूप में लघुकथा पाठकों के सम्मुख आती हैं , बल्कि एक आम लेखक/ पाठक द्वारा खुलकर उसे पढ़ा और लिखा जाता है । यह प्रयोग न केवल अपनी रोचकता बनाये हुए है बल्कि लेखकों और पाठकों के एक बड़े वर्ग को आकर्षित करता है । मुझे तो लगता है सिर्फ़ लघुकथा को पढ़ने से ज़्यादा महत्वपूर्ण इस विमर्श को पढ़ा जाना है ।मैं एक बार फिर से संपादकद्वय के प्रति हार्दिक आभार प्रकट करती हूँ । मैं काम्बोज सर की बहुत आभारी हूँ जिन्होंने मुझे न केवल यह मौक़ा दिया बल्कि मुझे सराहा भी जो एक लेखक के लिये उत्प्रेरक का कार्य करता है । साहित्य जगत में ऐसे प्रयोग का बहुत-बहुत स्वागत है ।
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