जून 2026

देशरक्षा-कवच     Posted: April 1, 2021

वे चारों नेवादा की बदनाम बस्ती के खिलण्दड़े आज भी अपने शिकार की तलाश में थे। यद्यपि स्टेट पुलिस चौकन्नी थी,पर पुलिस वालों को गच्चा देना वह जानते थे। भला हो उस अण्डरवर्ल्ड पत्रिका का, जिसमें शिकार पर कैसे झपटा जाए, यह सचित्र समझाया गया था।

‘‘क्लार्क देखो, शायद कोई कार है।’’

‘‘शायद, शायद से तुम्हारा क्या मतलब है, तुम्हें इतने दिन हमारे साथ हो गए- तुम इतना भी अंदाजा नहीं लगा सकते कि कौन से मेक की गाड़ी है।’’

गाड़ी फोर्ड कारखाने का नया मॉडल लगती थी। योजना के मुताबिक वे चारों सड़क पर लेट गए थे। जोर से ब्रेक के साथ ‘मिनी लिण्डा’ रुकी और धड़ाम से दरवाजा खुला- खूबसूरत लड़की के हाथ में पिस्तौल थी।

-देखो तुरन्त रफू चक्कर हो जाओ, तुम्हारी बदमाशी सारा अमरीका जान गया है।

वे चारों बेरोजगार युवक सकते में आ गए। वे चुपचाप उठे और एक तरफ जाने लगे। युवती विजयी अंदाज में बेपरवाही चाल से पलटी और धीरे से कार का दरवाजा खोला। वे चारों बाज की फुर्ती से उस युवती पर झपटे और अँधेरे की ओर ले चले। युवती यद्यपि उनको इस कमाण्डो शैली से हतप्रभ थी, लेकिन वह न तो चीखी और न ही चिल्ला-चिल्लाकर हाथ-पैर मारे।

‘फाड़ दो इसके कपड़े फैड्रिक’’ घृणा से जॉन हिट्टन बोला। आदेश का पालन हुआ। युवती मादरजात् अवस्था में रेगिस्तानी धरती पर पड़ी थी और वे झपट पड़ने से पहले अपने शिकार को परख रहे थे।

-पीटर देखो, कैसे मुस्करा रही है- मुझे तो वेश्या लगती है।

-पर मुझे तो कालेज गर्ल या सेल्स गर्ल लगती है। लड़की अब भी मुस्करा रही थी।

-शायद इसके प्रेमी ने इसे धोखा दे दिया है, इसलिए ये शोर क्यों मचाएगी।

‘‘ऐ लड़की! क्या तुझे हमसे डर नहीं लगता?’’

‘‘अपना काम करो और जाओ’’ आराम से लेटी निर्वस्त्र लड़की ने कहा। उसके इस वाक्य पर चारों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और कुछ असमंजस की स्थिति में आ गए।

‘‘दरअसल, जब तक हमारा शिकार चीखे-तड़पे नहीं, हमें मज़ा ही नहीं आता।’’

‘‘चुप हरामी की औलाद’’, जान चीखा और लड़की पर झुक गया, वह अब भी मुस्करा रही थी। जान परेशान हो गया।

‘‘अच्छा अगर तुम ये बता दो, तुम्हें हमसे डर क्यों नहीं लगता, हो सकता है हम तुम्हें छोड़ दें।’’

– ‘‘पर मैं छूटना नहीं चाहती, अपना काम जल्दी खत्म करो, मुझे देर हो रही है।’’

इस पर चारों ने एक दूसरे की ओर देखा। अचानक फैड्रिक ने लड़की की तरफ खचाक से चाकू तान दिया-‘‘बोल-जल्दी बोल कि तू हमसे खौफ़ क्यों नहीं खाती।’’

लड़की को अपना अस्तित्व मिटता नज़र आया। उसकी मुस्कराहट गायब हो गई। वह काँपने लगी- वैसे भी नंगा कोमल जिस्म ठण्डी बालू पर काँपेगा ही।

-‘‘जो मैं नहीं चाहती थी, आप मुझे उस बात के लिए मजबूर कर रहे हैं। मैं ‘एड्स’ की मरीज हूँ। सैकिण्ड स्टेज में चल रही हूँ।’’

इतना सुनना था कि वे चारों भूत की मानिन्द अँधेरे में गायब हो गए। युवती ने आसपास पड़े फटे कपड़ों को उठाया और कार में जा बैठी। वह पत्रकार लड़की अपनी सफलता पर मन ही मन मुस्करा रही थी।

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