जून 2026

देशान्तरराजा/जेम्स थर्बर     Posted: October 1, 2025

एक दिन सुबह जंगल में शेर जागा ओर उसने अपनी शेरनी से कहा, ‘‘मैं जंगल का राजा हूँ।’’

‘‘जंगल का राजा तो बब्बर शेर है,’’  शेरनी ने कहा।

‘‘अब परिवर्तन होना चाहिए। चाँद निकलने तक मैं जंगल के सभी जानवरों का राजा बन जाऊँगा’’-  शेर ने कहा, ‘‘चाँद मेरे सम्मान में ही निकलेगा।’’

वह वहाँ से चल पड़ा और जंगल में घूमता हुआ बब्बर शेर की माँद के पास पहुँचा, ‘‘बाहर निकला, उसने गरजकर कहा, ‘‘और जंगल के राजा से मिलो।’’

माँद में बब्बर शेरनी ने अपने साथी को जगाया, ‘‘राजा तुम्हें मिलने आया है।’’

‘‘कैसा राजा?’’ बब्बर शेर ने नींद में ही पूछा ।

‘‘जंगल के जानवरों का राजा?’’

‘‘जंगल के जानवरों का राजा तो मैं हूँ।’’ बब्बर शेर ने गरजकर कहा और लपककर माँद में से बाहर निकला।

शेर और बब्बर शेर की भयानक लड़ाई हुई, जो सूरज डूबने तक चलती रही। जंगल के सभी जानवर उस लड़ाई में शामिल हुए–कुछ शेर की ओर से लड़े, कुछ बब्बर शेर की ओर से। कुछ एक भूल गए कि वे किसकी ओर से लड़ रहे हैं। कुछ दोनों की ओर से लड़े और कुछ एक सिर्फ़ लड़ने की खातिर लड़े।

‘‘हम क्यों लड़ रहे हैं?’’ आखिर किसी ने पूछा।

‘‘पुरानी व्यवस्था के लिए।’’

जब चाँद चढ़ा तो जंगल में मौत की–सी चुप्पी छाई हुई थी। शेर के अलावा बाकी सब जानवर मर चुके थे। शेर इतना जख्मी हो चुका था कि अपनी जिन्दगी के आखिरी दिन गिन रहा था। उस समय वह उन मरे हुए जानवरों का राजा था।

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