इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र श्री योगेश कुमार ने कथादेश मासिक के अप्रैल 2016 में प्रकाशित श्री रामकुमार आत्रेय की पुरस्कृत लघुकथा ‘एकलव्य की विडम्बना’ को इलाहबाद की गलियों में स्ट्रीट प्ले के रूप में प्रस्तुत करने के लिए अनुमति माँगी है। योगेश कुमार तथा उसके सहयोगी छात्र मिलकर इस लघुकथा को स्ट्रीट प्ले के रूप में प्रस्तुत करेंगे। लघुकथा को एकांकी अथवा लघुनाटक के रूप में प्रस्तुत करने का यह एक अच्छा प्रयास है। इस समाचार से इस बात की पुष्टि होती है कि लघुकथा भी एक साहित्यिक विधा के रूप में पूरी तरह से स्थापित हो चुकी है। यह जनमानस पर अपना प्रभाव छोड़ पाने में पूरी तरह से सक्षम है। इस प्रयास के पीछे कथादेश पत्रिका का महत्त्वपूर्ण हाथ है; क्योंकि यह एक ऐसी पत्रिका है ,जो स्तरीय लघुकथाओं को प्रकाश में लाने के लिए प्रतिवर्ष प्रतियोगिता का आयोजन करती है। स्मरण रहे इससे पूर्व भी कथादेश द्वारा आयोजित लघुकथा प्रतियोगिता में पुरस्कृत श्री आत्रेय की लघुकथा ‘बिन शीशों का चश्मा’ का नाट्य रूपान्तरण करके इंदौर की एक संस्था ने उसका मंचन किया था।इसके लिए लेखक श्री आत्रेय भी बधाई के पात्र है।
प्रस्तुति- राधेश्याम भारतीय, नसीब विहार कालोनी ,घरौंडा करनाल 132114